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4 बहनों का एक भाई गरुड कमांडो, 5 आतंकियों को मारकर गिरा था, जानिए कौन?
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 31 Jan 2018 10:29 PM IST
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शहीद ज्योति प्रकाश निराला
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चार बहनों का इकलौता भाई, परिवार का इकलौता सहारा, लेकिन जाबांज इतना था कि लखवी के भतीजे समेत पांच आतंकियों को मारकर ही नीचे गिरा, जानिए कौन?
शहीद ज्योति प्रकाश निराला
ये बहादुर जवान था, भारतीय वायुसेना का गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला। जिन्हें 26 जनवरी 2018 को गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मरणोपरांत अशोक चक्र देकर सम्मानित किया। निराला कश्मीर के बांदीपुरा में खूंखार आतंकी सरगना जकीउर रहमान लखवी के भतीजे को मार गिराने वाले दस्ते में शामिल थे। शहीद का शव जब चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचा था तो पत्नी और बेटी की हालत देखकर हर कोई रो पड़ा।
शहीद ज्योति प्रकाश निराला
वहीं बेटे की शहादत की खबर सुनकर मां मालती देवी बेहोश हो गईं थी। होश आने पर वे चिल्ला उठती थीं, मेरा बेटा कहां गया... अब मां का हाल कौन पूछेगा। उधर, बहनों का रो-रो कर बुरा हाल था। बहन बिंदु, शशी और सुनीता कहती हैं कि अब वे किसे राखी बांधेगीं? ज्योति घर में इकलौते बेटे थे। उनकी चार छोटी बहनें हैं। पत्नी सुषमा नंद और तीन साल की बेटी जिज्ञासा पति के साथ चंडीगढ़ में रह रही थी।
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शहीद ज्योति प्रकाश निराला
शहीद निराला के पिता तेज नारायण भी बदहवास से थे। कहते रहे कि इस पाकिस्तान का कुछ क्यों नहीं कर रही सरकार। ना तो यह देश होता, नाहीं आतंकी होते और ना मां की कोख और बहु की मांग सूनी होती। फिर बोल पड़ते हैं कि अगर कुछ नहीं करती तो देश को उसी के हवाले क्यों नहीं कर देते। ज्योति तो चल गया, अब बहनों की शादी कैसे होगी। बीवी और बेटी को मैं कैसे संभालूंगा।
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शहीद ज्योति प्रकाश निराला
शहीद के पिता ने बताया था कि ज्योति 20 दिन पहले गांव से गया था और उसने मुझसे वादा किया था कि इस बार लौटने पर बहनों की शादी कर देगा, आप लड़का देख लिजिए। मैं बीमार रहता हूं, अकेला क्या क्या करुंगा। बेटा चला गया, मेरा सब कुछ चला गया। अब जिंदगी में कुछ बचा नहीं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तमाम दुखों के बाद एक ही बात का संतोष है कि उनका बेटा मातृभूमि के लिए शहीद हुआ।