{"_id":"597ebbfd4f1c1b044c8b47ef","slug":"india-s-memorable-singer-mohammad-rafi-life-untold-facts","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"मोहम्मद रफी: ऐसा फनकार न कभी था, न कभी होगा... जानिए उनसे जुड़ी 12 खास बातें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोहम्मद रफी: ऐसा फनकार न कभी था, न कभी होगा... जानिए उनसे जुड़ी 12 खास बातें
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Aug 2017 09:18 AM IST
विज्ञापन
mohammad rafi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आज हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे महान फनकार की जिंदगी से जुड़ी खास बातें, जो न कभी हुआ था और न कभी होगा। ये हैं- सुरों के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी।
mohammad rafi
मुस्लिम परिवार में जन्म हुआ था
पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में 24 दिसंबर 1924 को हाजी अली मोहम्मद के परिवार में मोहम्मद रफी का जन्म हुआ था। हाजी अली मोहम्मद के छह बच्चों में से रफी दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। 1935 में रफी के पिता लाहौर चले गए और वहां भट्टी गेट के नूर मोहल्ला में हजामत बनाने का काम शुरू किया।
पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में 24 दिसंबर 1924 को हाजी अली मोहम्मद के परिवार में मोहम्मद रफी का जन्म हुआ था। हाजी अली मोहम्मद के छह बच्चों में से रफी दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। 1935 में रफी के पिता लाहौर चले गए और वहां भट्टी गेट के नूर मोहल्ला में हजामत बनाने का काम शुरू किया।
mohammad rafi
13 साल की उम्र में पहली बार गाया
रफी साहब ने उस्ताद अब्दुल वहीद खां, पंडित जीवन लाल मट्टू और फिरोज निजामी से शास्त्रीय संगीत सीखा। 13 साल की उम्र में पहली बार स्टेज पर परफॉर्म किया। तब उन्होंने केएल सहगल के गाने गाए थे। 1941 में उन्होंने पंजाबी फिल्म के लिए गाना गाया, फिर आकाशवाणी लाहौर के लिए गाने गाए। रफी के बड़े भाई के दोस्त अब्दुल हमीद ने रफी की प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने ही परिवार को मनाया कि वो रफी को बंबई जाने दें।
रफी साहब ने उस्ताद अब्दुल वहीद खां, पंडित जीवन लाल मट्टू और फिरोज निजामी से शास्त्रीय संगीत सीखा। 13 साल की उम्र में पहली बार स्टेज पर परफॉर्म किया। तब उन्होंने केएल सहगल के गाने गाए थे। 1941 में उन्होंने पंजाबी फिल्म के लिए गाना गाया, फिर आकाशवाणी लाहौर के लिए गाने गाए। रफी के बड़े भाई के दोस्त अब्दुल हमीद ने रफी की प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने ही परिवार को मनाया कि वो रफी को बंबई जाने दें।
विज्ञापन
विज्ञापन
mohammad rafi
13 साल की उम्र में पहली शादी हुई
बात 1942 की है, रफी साहब अब्दुल हमीद के साथ बंबई आ गए। यहां वे और हमीद 10 बाई 10 के कमरे में रुके, जो भिंडी बाजार में था। 13 साल की उम्र में रफी की पहली शादी उनके चाचा की बेटी बशीरन बेगम से हुई थी, लेकिन कुछ साल बाद ही उनका तलाक हो गया था। इस शादी से उनका एक बेटा सईद हुआ था। उनके इस पहले विवाह के बारे में घर में सभी को मालूम था, लेकिन बाहरी लोगों से इसे छिपा कर रखा गया था।
बात 1942 की है, रफी साहब अब्दुल हमीद के साथ बंबई आ गए। यहां वे और हमीद 10 बाई 10 के कमरे में रुके, जो भिंडी बाजार में था। 13 साल की उम्र में रफी की पहली शादी उनके चाचा की बेटी बशीरन बेगम से हुई थी, लेकिन कुछ साल बाद ही उनका तलाक हो गया था। इस शादी से उनका एक बेटा सईद हुआ था। उनके इस पहले विवाह के बारे में घर में सभी को मालूम था, लेकिन बाहरी लोगों से इसे छिपा कर रखा गया था।
विज्ञापन
mohammad rafi
20 साल की उम्र में दूसरी शादी हुई
1944 में 20 साल की उम्र में रफी की दूसरी शादी सिराजुद्दीन अहमद बारी और तालिमुन्निसा की बेटी बिलकिस के साथ हुई। जिनसे उनके तीन बेटे खालिद, हामिद और शाहिद हुए। तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद और यास्मीन अहमद भी हुईं। रफी साहब के तीनों बेटों सईद, खालिद और हामिद की मौत हो चुकी है। आजादी के समय विभाजन के दौरान उन्होने भारत में रहना पसन्द किया। 31 जुलाई 1980 को उनका निधन हो गया।
1944 में 20 साल की उम्र में रफी की दूसरी शादी सिराजुद्दीन अहमद बारी और तालिमुन्निसा की बेटी बिलकिस के साथ हुई। जिनसे उनके तीन बेटे खालिद, हामिद और शाहिद हुए। तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद और यास्मीन अहमद भी हुईं। रफी साहब के तीनों बेटों सईद, खालिद और हामिद की मौत हो चुकी है। आजादी के समय विभाजन के दौरान उन्होने भारत में रहना पसन्द किया। 31 जुलाई 1980 को उनका निधन हो गया।