यहां शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां
मार्च माह में अमर शहीदों की याद में शहीदी दिवस मनाई जाती है। दरअसल 23 मार्च को शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई थी। जानना चाहेंगे उनकी समाधि कहां और किस हाल में है? देखिए तस्वीरों में।
यहां शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां
पंजाब के फिरोजपुर से 10 किलोमीटर दूर पाकिस्तान से लगती भारतीय सीमा में हुसैनीवाला बार्डर पर भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की समाधि स्थल बनाई गई है।
यहां शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां
फिरोजपुर शहर से 10 किलोमीटर दूरी पर बने हुसैनीवाला बार्डर पर ये वही जगह है जो कुछ साल पहले पाकिस्तान के कब्जे में थी। यहां पर शहीद भगत सिंह के अलावा सुखदेव, राजगुरु और बटुकेश्वर दत्त जैसे आज़ादी के दीवानों की समाधि है।
यहां शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां
यहां पर वह पुरानी जेल भी है, जहां भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव लाहौर जेल में शिफ्ट करने से पहले रखा गया था। स्मारक स्थल पर लगे बोर्ड के मुताबिक अंग्रेज पुलिस अधिकारी सांड्रस की हत्या के दोष में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई गई तो इसके विरोध में पूरा लाहौर बगावत के लिए उठ खड़ा हुआ।
यहां शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां
डरी हुई ब्रिटिश सरकार ने निश्चित तारीख से एक दिन पहले 23 मार्च 1931 को शाम 7 बजे तीनों को फांसी दे दी। उसके बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शवों के टुकड़े-टुकड़े कर अंग्रेज उन्हें लाहौर जेल की पिछली दीवार तोड़कर सतलुज दरिया के किनारे लाए और रात के अंधेरे में यहां बिना रीति रिवाज के जला दिया।