फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

यहां शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां

Thu, 03 Mar 2016 11:00 AM IST
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 03 Mar 2016 11:00 AM IST
विज्ञापन

यहां शहीदे आजम भगत ‌सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां

hussainiwala border, Shaheed sthal of bhagat singh, rajguru and sukhdev

मार्च माह में अमर शहीदों की याद में शहीदी दिवस मनाई जाती है। दरअसल 23 मार्च को शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई थी। जानना चाहेंगे उनकी समाधि कहां और किस हाल में है? देखिए तस्वीरों में।

यहां शहीदे आजम भगत ‌सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां

hussainiwala border, Shaheed sthal of bhagat singh, rajguru and sukhdev

पंजाब के फिरोजपुर से 10 किलोमीटर दूर पाकिस्तान से लगती भारतीय सीमा में हुसैनीवाला बार्डर पर भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की समाध‌ि स्‍थल बनाई गई है।

यहां शहीदे आजम भगत ‌सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां

hussainiwala border, Shaheed sthal of bhagat singh, rajguru and sukhdev

फिरोजपुर शहर से 10 किलोमीटर दूरी पर बने हुसैनीवाला बार्डर पर ये वही जगह है जो कुछ साल पहले पाकिस्तान के कब्जे में थी। यहां पर शहीद भगत सिंह के अलावा सुखदेव, राजगुरु और बटुकेश्वर दत्त जैसे आज़ादी के दीवानों की समाधि है।

विज्ञापन
विज्ञापन

यहां शहीदे आजम भगत ‌सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां

hussainiwala border, Shaheed sthal of bhagat singh, rajguru and sukhdev

यहां पर वह पुरानी जेल भी है, जहां भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव लाहौर जेल में शिफ्ट करने से पहले रखा गया था। स्मारक स्थल पर लगे बोर्ड के मुताबिक अंग्रेज पुलिस अधिकारी सांड्रस की हत्या के दोष में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई गई तो इसके विरोध में पूरा लाहौर बगावत के लिए उठ खड़ा हुआ।

विज्ञापन

यहां शहीदे आजम भगत ‌सिंह, सुखदेव और राजगुरु के हैं निशां

hussainiwala border, Shaheed sthal of bhagat singh, rajguru and sukhdev

डरी हुई ब्रिटिश सरकार ने निश्चित तारीख से एक दिन पहले 23 मार्च 1931 को शाम 7 बजे तीनों को फांसी दे दी। उसके बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शवों के टुकड़े-टुकड़े कर अंग्रेज उन्हें लाहौर जेल की पिछली दीवार तोड़कर सतलुज दरिया के किनारे लाए और रात के अंधेरे में यहां बिना रीति रिवाज के जला दिया।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed