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23 मार्च: यहां शहीदों की याद में एक बार चलती है ट्रेन

Wed, 23 Mar 2016 02:17 PM IST
विजय जैन/अमर उजाला, चंडीगढ़
विजय जैन/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 23 Mar 2016 02:17 PM IST
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हुसैनीवाला में ही रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर लिखा गया है- द एंड ऑफ नार्दर्न रेलवे - फोटो : अमर उजाला
क्या आप जानते हैं कि भारत में एक जगह ऐसी भी है, जहां साल में केवल एक दिन शहीदों के लिए यानी 23 मार्च को ही ट्रेन चलती है।

23 मार्च: यहां शहीदों के लिए साल में एक बार चलती है ट्रेन

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फिरोजपुर जंक्शन से हुसैनीवाला के बीच 10 किलोमीटर का सफर तय करती है - फोटो : अमर उजाला
फिरोजपुर से लेकर हुसैनीवाला बॉर्डर तक स्पेशल ट्रेन 10 किलोमीटर का सफर तय करती है। एक समय में ये रेल लाइन हुसैनीवाला से होकर लाहौर तक जाती थी पर पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान यह रेल मार्ग बंद कर दिया गया। यहां सतलुज दरिया पर बने रेल पुल को भी तोड़ दिया गया। अब फिरोजपुर से हुसैनीवाला में ही आकर रेल लाइन खत्म हो जाती है। रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर यहां लिखा गया है - द एंड ऑफ नार्दर्न रेलवे।

23 मार्च: यहां शहीदों के लिए साल में एक बार चलती है ट्रेन

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हुसैनीवाला बॉर्डर पर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधि - फोटो : अमर उजाला
पूरे साल में एक दिन, केवल 23 मार्च को फिरोजपुर से एक स्पेशल ट्रेन बार्डर के लिए चलती है। गौरतलब है कि फिरोजपुर शहर से 10 किलोमीटर दूरी पर बने हुसैनीवाला बॉर्डर पर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधि है। इस समाधि पर 23 मार्च को हर साल मेला लगता है। शहीदी मेले में दूर-दूर से पर्यटक शामिल होते हैं। पिछले साल तो यहां के मेले में खुद पीएम मोदी आए थे।
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पुराना रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
बहुत कम लोग जानते होंगे कि हुसैनीवाला स्थित समाधि स्थल 1960 से पहले पाकिस्तान के कब्जे में था। जन भावनाओं को देखते हुए 1950 में तीनों शहीदों की समाधि स्थल पाक से लेने की कवायद शुरू हुई। करीब 10 साल बाद फाजिल्का के 12 गांव व सुलेमान की हेड वर्क्स पाकिस्तान को देने के बाद शहीद त्रिमूर्ति से जुड़ा समाधि स्थल भारत को मिल गया।
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23 मार्च: यहां शहीदों के लिए साल में एक बार चलती है ट्रेन

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समाधि स्थल को अब पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला
सतलुज दरिया के करीब बने इस समाधि स्थल को अब पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। समाधि स्थल के आसपास ग्रीनरी क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां पार्क और झूले-फव्वारे लगाए गए हैं। शुक्रवार और रविवार को खास तौर पर सैलानियों की भीड़ होती है।
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