फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

उम्र के साथ शरीर का विकास न हो तो संभल जाएं, ये गंभीर बीमारी हो सकती है

Tue, 26 Dec 2017 06:23 PM IST
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक Updated Tue, 26 Dec 2017 06:23 PM IST
विज्ञापन
health tips, be aware of Allergies to Wheat
उम्र के साथ शरीर का विकास
उम्र के साथ अगर शरीर का विकास न हो रहा हो तो संभल जाएं। अनदेखी करना सही नहीं, ये बीमारी हो सकती है, जो जिंदगी बर्बाद कर देगी।
health tips, be aware of Allergies to Wheat
उम्र के साथ शरीर का विकास - फोटो : DEMO Pics
उम्र के हिसाब से यदि बच्चे के शरीर का विकास नहीं हो रहा है तो अलर्ट हो जाएं, क्योंकि यह गेहूं की एलर्जी के संकेत हो सकते हैं। सेलियक नामक यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। हरियाणा में इस बीमारी की दर देश में सबसे ज्यादा है।

 
health tips, be aware of Allergies to Wheat
उम्र के साथ शरीर का विकास
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की टास्क फोर्स के देश में आठ साल तक चले अध्ययन में यह सामने आया है कि हरियाणा में प्रति हजार आबादी में 8 से ज्यादा लोग सेलियक से पीड़ित हैं, जबकि देश में यह औसत प्रति हजार 2 से भी कम है। टास्क फोर्स ने 2008 से 2016 तक पूरे देश में सेलियक के मरीजों का सर्वे किया। इसमें सबसे अधिक मरीज उत्तर भारत में पाये गए और इनमें भी हरियाणा नंबर वन है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
health tips, be aware of Allergies to Wheat
उम्र के साथ शरीर का विकास
देश में जहां प्रति हजार आबादी पर 1.04 मरीज हैं, वहीं हरियाणा में यह औसत 8.53 है। हरियाणा के बाद पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और उत्तराखंड में मरीजों की संख्या ज्यादा है। पीजीआई रोहतक के गेस्ट्रोएंटोलॉजी विभाग और मेडिसन विभाग में इस बीमारी की जांच की जाती है। पीजीआई में गेहूं की एलर्जी के मरीजों के लिए 2010 से सिलियक क्लीनिक चलाया जा रहा है। सात साल में अब तक एक हजार मरीज सामने आए हैं।
विज्ञापन
health tips, be aware of Allergies to Wheat
उम्र के साथ शरीर का विकास
ऐसे होती है जांच
मरीज का आईजीएटीटीजी एंटी बाडी टेस्ट करते हैं। इसकी बाजार में कीमत 600 से 700 रुपये है, लेकिन पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद और डीन डॉ. एमसी गुप्ता के प्रयासों के चलते यह जांच निशुल्क करने की तैयारी है। इसके लिए प्रशासन ने किट उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों से डिमांड की है। इसके अलावा दूरबीन से जांच कर छोटी आंत की बायोपसी ली जाती है। इसे पैथोलॉजी विभाग की प्रयोगशाला में जांचा जाता है। यह जांच भी संस्थान में निशुल्क होती है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed