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एक दिन में दो खुशी, एक बेटा IAS तो दूसरा इंडियन नेवी में बना सब-लेफ्टिनेंट
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
Updated Fri, 02 Jun 2017 09:52 AM IST
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Panipat News
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पानीपत के दो परिवारों के लिए लिए वीरवार का दिन खुशियों भरा रहा। एक परिवार का बेटा वरुण सिंगला यूपीएससी की परीक्षा में 114वीं रैंक हासिल कर आईएएस के लिए चयनित हुआ तो दूसरे परिवार का बेटा रितिश शर्मा इंडियन नेवी में कमीशन प्राप्त कर सब-लेफ्टिनेंट बना। वरुण सिंगला सेक्टर-18 के रहने वाले हैं, जबकि रितिश शर्मा नौल्था गांव के हैं। दो होनहारों के अफसर बनने से गांव से लेकर शहर तक खुशियां छाई रहीं। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में खुद को साबित कर युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं।
वरुण सिंगला
वरुण सिंगला एजीई से बने आईएएस
हुडा सेक्टर-18 निवासी वरुण सिंगला के पिता सत्यप्रकाश सिंगला पीडब्ल्यूडी पानीपत में एसडीओ हैं। जबकि, मां राजेश रानी गृहणी हैं। बड़े भाई अरुण सिंगला का पानीपत में अपना बिजनेस है। वरुण सिंगला ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी कानपुर से की है। उन्होंने चार साल पहले आईईएस की परीक्षा पास की और मिल्ट्री इंजीनियरिंग सर्विस दिल्ली में एजीई (एसडीओ) के पद पर ज्वाइन किया।
हुडा सेक्टर-18 निवासी वरुण सिंगला के पिता सत्यप्रकाश सिंगला पीडब्ल्यूडी पानीपत में एसडीओ हैं। जबकि, मां राजेश रानी गृहणी हैं। बड़े भाई अरुण सिंगला का पानीपत में अपना बिजनेस है। वरुण सिंगला ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी कानपुर से की है। उन्होंने चार साल पहले आईईएस की परीक्षा पास की और मिल्ट्री इंजीनियरिंग सर्विस दिल्ली में एजीई (एसडीओ) के पद पर ज्वाइन किया।
वरुण सिंगला
लक्ष्य साधकर आगे बढने पर जरूर मिलती है सफलता
वरुण सिंगला ने बताया कि उनका सपना इंडियन सिविल सर्विसेज में जाना था। इसके लिए उन्होंने आईआईटी और फिर आईईएस की परीक्षा पास करने के लिए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। यूपीएससी की परीक्षा तीन बार पास की, लेकिन इंटरव्यू में मासूयी हाथ लगी। अब चौथी बार पिछली कमियों को दूर किया और सफलता हासिल की।
वरुण सिंगला ने बताया कि उनका सपना इंडियन सिविल सर्विसेज में जाना था। इसके लिए उन्होंने आईआईटी और फिर आईईएस की परीक्षा पास करने के लिए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। यूपीएससी की परीक्षा तीन बार पास की, लेकिन इंटरव्यू में मासूयी हाथ लगी। अब चौथी बार पिछली कमियों को दूर किया और सफलता हासिल की।
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इंडियन नेवी में सब.लैफ्टिनेंट रितिश शर्मा अपने परिवार के साथ।
रितिश का एनडीए में हो हुआ था सेलेक्शन
जिले के गांव नौल्था के रितिश शर्मा इंडियन नेवी में सब-लेफ्टिनेंट बने हैं। उनके पिता अनिल कुमार और मां प्रभा शर्मा नौल्था गांव स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में टीचर हैं। रितिश शर्मा का 2013 में एनडीए में सेलेक्शन हुआ था और केरल स्थित इंडियन नेवी की एकेडमी में ट्रेनिंग की। रितिश शर्मा की 27 मई को पासिंग आउट परेड हुई। पिता अनिल कुमार और मां प्रभा शर्मा ने बताया कि वे भी पासिंग आउट के मौके पर एकेडमी में थे। वे अपने बेटे को नेवी के अफसर की वर्दी में देखकर बहुत खुश हुए। रितिश शर्मा ने बताया कि उसने दसवीं कक्षा की पढ़ाई डीएवी पब्लिक स्कूल थर्मल और 12वीं जवाहर नवोदय विद्यालय नौल्था से पास की है।
जिले के गांव नौल्था के रितिश शर्मा इंडियन नेवी में सब-लेफ्टिनेंट बने हैं। उनके पिता अनिल कुमार और मां प्रभा शर्मा नौल्था गांव स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में टीचर हैं। रितिश शर्मा का 2013 में एनडीए में सेलेक्शन हुआ था और केरल स्थित इंडियन नेवी की एकेडमी में ट्रेनिंग की। रितिश शर्मा की 27 मई को पासिंग आउट परेड हुई। पिता अनिल कुमार और मां प्रभा शर्मा ने बताया कि वे भी पासिंग आउट के मौके पर एकेडमी में थे। वे अपने बेटे को नेवी के अफसर की वर्दी में देखकर बहुत खुश हुए। रितिश शर्मा ने बताया कि उसने दसवीं कक्षा की पढ़ाई डीएवी पब्लिक स्कूल थर्मल और 12वीं जवाहर नवोदय विद्यालय नौल्था से पास की है।
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इंडियन नेवी में सब.लैफ्टिनेंट रितिश शर्मा
कम्यूनिकेशन स्किल और पढ़ाई पर दें ध्यान : युवा
रितिश शर्मा ने बताया कि उन्होंने दसवीं पास करने के बाद 11वीं कक्षा में एनडीए की तैयारी शुरू कर दी। इस समय अच्छी तैयारी की जाए तो एनडीए में सेलेक्शन मुश्किल नहीं है। युवा पीढ़ी को विषय की पढ़ाई के साथ स्किल डेवलेपमेंट पर भी ध्यान देना चाहिए। मुझे समुद्री जहाज और नेवी यूनिफार्म शुरू से ही पसंद थी। मैंने मेहनत, मां-बाप वऔर गुरुजनों के आशीर्वाद से मंजिल हासिल कर ली है।
रितिश शर्मा ने बताया कि उन्होंने दसवीं पास करने के बाद 11वीं कक्षा में एनडीए की तैयारी शुरू कर दी। इस समय अच्छी तैयारी की जाए तो एनडीए में सेलेक्शन मुश्किल नहीं है। युवा पीढ़ी को विषय की पढ़ाई के साथ स्किल डेवलेपमेंट पर भी ध्यान देना चाहिए। मुझे समुद्री जहाज और नेवी यूनिफार्म शुरू से ही पसंद थी। मैंने मेहनत, मां-बाप वऔर गुरुजनों के आशीर्वाद से मंजिल हासिल कर ली है।