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निरंकारी मिशन की दूसरी महिला सतगुरु बनने के बाद पहली बार बोलीं माता सुदीक्षा सविंदर, कहा...

Thu, 19 Jul 2018 12:01 PM IST
गोविंद परवाना, अमर उजाला, चंडीगढ़
गोविंद परवाना, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 19 Jul 2018 12:01 PM IST
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First Statement of Nirankari Mission New Head Mata Sudiksha Savinder Hardev
माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव
संत निरंकारी मिशन की छठवीं और दूसरी महिला प्रमुख बनने के बाद माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव ने पहली बार भक्तों को संबोधित किया। जानिए वे क्या बोलीं...
First Statement of Nirankari Mission New Head Mata Sudiksha Savinder Hardev
माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव
माता सविंदर हरदेव जी के आदेश व आशीर्वाद से उनकी पुत्री सुदीक्षा को औपचारिक रूप से संत निरंकारी मिशन का सद्गुरु और आध्यात्मिक प्रमुख बनाया गया है। 17 मार्च 2018 को दिल्ली में हुए समागम में माता सविंदर हरदेव जी ने सुदीक्षा के माथे पर तिलक लगाकर उन्हें आसन पर बैठाया और निरंकारी सद्गुरु की आध्यात्मिक शक्तियों का प्रतीक सफेद दुपट्टा पहनाया।
First Statement of Nirankari Mission New Head Mata Sudiksha Savinder Hardev
माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव
इसके बाद संत निरंकारी मंडल प्रधान गोविंद सिंह, चेयरमैन केन्द्रीय योजना व सलाहकार बोर्ड चेयरमैन खेमराज चड्ढा, मंडल के महासचिव वीडी नागपाल, प्रचार व प्रबंध के साथ जुडे़ अन्य वरिष्ठ संतों और गुरु परिवार के सदस्यों ने समस्त निरंकारी परिवार की ओर से सद्गुरु सुदीक्षा को फूल मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।
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First Statement of Nirankari Mission New Head Mata Sudiksha Savinder Hardev
माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव
इस दौरान माता सविंदर हरदेव जी महाराज ने कहा कि ऐसा बहुत कुछ बाकी है, जो बाबा हरदेव जी महाराज करना चाहते थे और नहीं कर पाए। मुझे उनके सपनों को पूरा करने का मौका मिला, लेकिन स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा। अब हमें उम्मीद है कि आप सभी सुदीक्षा के मार्गदर्शन में उन कार्यों को पूरा कर पाएं।
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First Statement of Nirankari Mission New Head Mata Sudiksha Savinder Hardev
सुदीक्षा बनीं संत निरंकारी मिशन की प्रमुख - फोटो : अमर उजाला
निरंकारी सद्गुरु की जिम्मेदारियों को संभालने के बाद माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव जी महाराज ने कहा कि मेरे में कोई ऐसा गुण तो नहीं हैं, लेकिन इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया है, क्योंकि यह सद्गुरु से आशीर्वाद के रूप में आई है। उन्होंने कहा कि हरदेव जी महाराज ने कहा था कि वह साध संगत को अपने सिर का ताज मानते हैं, उसी तरह मैं भी उसका पालन करूंगी।
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