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Hindi News ›   Chandigarh ›   Fast Track Court Historical Decision in Case of Girl Child on Womens Day

वूमेन्स डे पर फास्ट ट्रैक कोर्ट का सराहनीय फैसला- बच्ची के खाते में जमा कराए जाएं पौने चार लाख

Sun, 10 Mar 2019 02:25 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 10 Mar 2019 02:25 PM IST
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Fast Track Court Historical Decision in Case of Girl Child on Womens Day
सांकेतिक तस्वीर
महिला दिवस पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक बेहद सराहनीय फैसला सुनाया। सहमति के बाद संबंधों से पैदा हुई बच्ची के खाते में पौने चार लाख रुपये जमा कराने के आदेश दिए गए। इसमें 3 लाख रुपये लीगल एड अथॉरिटी की तरफ से और 75 हजार रुपये आरोपमुक्त हो चुके युवक को जमा कराने होंगे। फैसले में जज आरपी गोयल की अदालत ने साफ किया है कि यह राशि बच्ची के खाते में जमा करवाकर उसकी एफडीआर करवाई जाए, ताकि राशि उसे वयस्क होने पर मिल सके।
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दो साल पहले एक युवती ने अर्बन एस्टेट थाने में दी शिकायत में आरोप लगाया था कि छह माह पहले जान से मारने की धमकी देकर एक युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में उसकी शहर से बाहर शादी हो गई। अधिवक्ता ने बताया कि जब शादी को 2 से 3 माह हुए तो पता चला कि युवती पांच माह की गर्भवती है। इसके बाद युवती मायके आ गई और अर्बन एस्टेट थाने में आरोपी युवक के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 व 506 के तहत मामला दर्ज कराया।
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सहमति से संबंध मानकर युवक को बरी कर दिया गया

Fast Track Court Historical Decision in Case of Girl Child on Womens Day
सांकेतिक तस्वीर
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तभी से जिला अदालत में सुनवाई चल रही थी। फरवरी में अदालत ने दोनों के बीच सहमति से संबंध मानकर युवक को बरी कर दिया, लेकिन कोर्ट के सामने सवाल खड़ा हो गया कि सहमति से बने संबंधों से पैदा हुई बच्ची का क्या कसूर है। युवक ने अदालत को कहा कि बेशक वह उस बच्ची का पिता नहीं है, लेकिन वह उसे अपने साथ रखने के लिए तैयार है। क्योंकि उसकी पत्नी ने उसे जन्म दिया है।

अदालत ने अपने फैसले में लिखा कि मां तो अपनी बेटी से प्यार करेगी, लेकिन सौतेले पिता से उम्मीद नहीं की जा सकती। ऐसे में बच्ची के सुरक्षित भविष्य के लिए लीगल एड अथॉरिटी की तरफ से 3 लाख और आरोपी युवक मुआवजे के तौर पर 75 हजार रुपये जमा कराए। फास्ट ट्रैक कोर्ट शुक्रवार को बच्ची की मां और युवक ने बयान दर्ज कराए। मां ने बताया कि उसने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। साथ ही गवाही भी दी थी।

मां ने बताया कि उसकी सालाना आय एक लाख से कम है। बच्ची उसके घर पर है। आरोपमुक्त हुए युवक ने कोर्ट को बताया कि उसकी मासिक आय 15 हजार रुपये है, फिर भी वह बच्ची का खर्च उठाने के लिए तैयार है। अदालत ने फैसले में कहा कि लीगल एड अथॉरिटी की तरफ से उक्त राशि बच्ची के खाते में जमा करवाकर अदालत को रिपोर्ट दी जाए। अगर बच्ची का बैंक अकाउंट खुलवाने में कोई परेशानी आती है तो अदालत को अवगत कराया जाए।
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