तीन गोलियां शरीर के अंदर थीं। ऐसी हालत में 4-5 दिन तक ही मरीज बचते हैं, जबकि ब्रिगेडियर 48 दिन तक जिंदा रहे, ऐसा केवल फाइटर ही कर सकता है।
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आरएसएस नेता जगदीश गगनेजा पर जालंधर में गोलीबारी
- फोटो : अमर उजाला
ये कहना था आरएसएस के वरिष्ठ नेता रिटायर्ड ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा का इलाज कर रहे डीएमसी के डॉक्टरों का। उन्होंने बताया कि गोलियों ने शरीर में बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा दिया था। यूं तो उनकी किडनी, लीवर और सारे महत्वपूर्ण अंग ठीक थे लेकिन कई जगह से आंत के कट जाने से और गोली लगने से शरीर में इंफेक्शन फैलना शुरू हो गया था। पहले इंफेक्शन पेट तक ही सीमित था लेकिन बुधवार को छाती तक पहुंच चुका था।
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आरएसएस नेता जगदीश गगनेजा पर जालंधर में गोलीबारी
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डाक्टरों के मुताबिक ऐसी इंजरी में ज्यादा से ज्यादा 4-5 दिन तक ही मरीज बचते हैं। 48 दिन तक उन्होंने संघर्ष किया। गोलियां लगने से उनके शरीर का लगभग सारा खून बह चुका था। खून भी चढ़ाया गया लेकिन तब तक वह दिमाग पर बहुत गंभीर असर डाल चुका था। कई दिन हम चार पांच घंटे के लिए वेंटीलेटर भी हटा देते थे लेकिन बाद में शरीर खुद सांस लेने में असमर्थ हो जाता था। हमें वेंटिलेटर से सांस देना पड़ता।
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Brigadier (Retd), Jagdish, Gagneja
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डाक्टरों के मुताबिक बुधवार को जब इंफेक्शन पेट से ऊपर सारे शरीर में फैलने लगा। उसे कंट्रोल नहीं कर पाए। इतने दिन तक लड़ाई कोई फाइटर ही लड़ सकता है। जिस तरह की इंजरी ब्रिगेडियर गगनेजा को हुई थी ज्यादा से ज्यादा 4-5 दिन तक ही मरीज बचते हैं। उन्होंने 47 दिन जंग लड़ी। परिवार ने बताया कि गुरुवार सुबह डॉक्टरों ने हमसे कह दिया था कि उनको नहीं बचाया जा सकता और समय बेहद कम बचा है। वह आखिरी समय बिलकुल नहीं तड़पे।
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आरएसएस नेता जगदीश गगनेजा पंचतत्व में विलीन
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बेटी ने बताया कि चाहे कितनी भी गोलियां उन्हें लगी थी लेकिन अंतिम समय तक उन्होंने उफ नहीं की। पत्नी सुदेश ने बताया कि जब उन्हें गोलियां लगी थीं तब भी वह गाड़ी में बैठकर अस्पताल पहुंचे थे। हम चिल्लाने लगे तो उन्होंने हमें चुप कराया। अस्पताल के स्टाफ को भी उन्होंने कहा कि पेट पर गोलियां लगी हैं यहां दबाव न डालें। ऑप्रेशन थियेटर तक पूरे होश में थे और जब डॉक्टर आए तो उन्होंने कहा कि तुम लोग बाहर जाओ डॉक्टरों को काम करने दो।