दिवाली पर स्वर्ण मंदिर की खूबसूरती देखते ही बनती है। श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी भी लगाई। तस्वीरें
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दिवाली पर रोशनी में नहाया स्वर्ण मंदिर
दिवाली पर्व (बंदी छोड़ दिवस) हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दीवाली पर स्वर्ण मंदिर पर जगमगाती रोशनी की शोभा देखते ही बन रही है। सिख धर्म में दीवाली को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके पीछे एक ऐतिहासिक मान्यता है।
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दिवाली पर रोशनी में नहाया स्वर्ण मंदिर
माना जाता है कि दीवाली वाले दिन सिखों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से मुक्ति मिली थी। मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु हरगोविंद सिंह जी की बढ़ती शक्ति से घबरा कर उन्हें और उनके 52 साथियों को ग्वालियर के किले में बंदी बनाया हुआ था।
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दिवाली पर रोशनी में नहाया स्वर्ण मंदिर
देश भर के लोगों द्वारा हरगोविंद सिंह जी को छोड़ने की अपील पर जहांगीर ने सन् 1619 ईसवीं में गुरु को दीवाली वाले दिन मुक्त किया था। कैद से मुक्त होते ही गुरु अमृतसर पहुंचे और वहां विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया। गुरु की माता ने सभी लोगों उनके रिहा होने की खुशी में मिठाई बांटी और चारों ओर दीप जलाए गए।
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दिवाली पर रोशनी में नहाया स्वर्ण मंदिर
इसी वजह से सिख धर्म में दीवाली को 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा अमृतसर के प्रसिद्घ स्वर्ण मंदिर की नींव सन् 1577 में दीवाली के दिन ही रखी गई थी। सिख धर्म में दीवाली के त्योहार को तीन दिन तक एंजॉय किया जाता है।