शहीद राममेहर का शव जैसे ही गांव पहुंचा तो गांव का हर शख्स रो पड़ा। गांव में शव आने की खबर पहुंची तो हर घर और गली से रोते हुए ग्रामीण शव की ओर दौड़ पड़े।
मेरा भाई आ गया, मेरा भाई आ गया, राम-राम भाई। भाई सब तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे। तू आ गया, भाई तुझ पर सभी को गर्व है। जब शहीद राममेहर का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा तो छोटा भाई यह कहते हुए दौड़ पड़ा, जिसे सुन हर आंखें नम हो गई।
एक तरफ जहां शहीद के पिता पूर्ण चंद अपने बेटे की शहादत पर गर्व महसूस कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ छोटा भाई महिंदर भी आंसुओं को रोक कर दौड़-दौड़ कर लोगों को बता रहा था कि उसका भाई आ गया।
शहीद राममेहर की मां मामकौर भी अपने बेटे के बलिदान पर गौरवान्वित थी और बोल रही थी कि राममेहर ने देश का बेटा होने का सही फर्ज निभाया है। वहीं शहीद की पत्नी पूनम ने कहा कि उनके जाने के कारण मेरी जिंदगी तबाह हो गई, लेकिन उनकी शहादत पर मुझे नाज है।
गमगीन माहौल और गौरवान्वित करने वाले उद्घोषों के बीच शहीद पंचतत्व में विलीन हुए। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए जहां हजारों ग्रामीण व आसपास के लोग पहुंचे।