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देखिए एक गांव, जहां मिले थे इंसान की मौजूदगी के 26 लाख साल पुराने सुबूत

Thu, 08 Jun 2017 09:09 AM IST
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल Updated Thu, 08 Jun 2017 09:09 AM IST
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chandigarh village masol found fosils of human being presence
चंडीगढ़ का अनोखा गांव मसोल
तस्वीरों में दे​खिए देश में एक ऐसा गांव, जहां इंसान की मौजूदगी के 26 लाख साल पुराने सुबूत मिले थे। इनकी वजह से ही देश को दुनिया में पहचान मिली।
chandigarh village masol found fosils of human being presence
चंडीगढ़ का अनोखा गांव मसोल
हम बात कर रहे हैं, चंडीगढ़ से करीब 18 किलोमीटर दूर मसोल गांव की। पंजाब के मोहाली जिले में पड़ने वाले गांव मसोल एक ऐतिहासिक रिसर्च के कारण चर्चा में आया था। इस गांव की वजह से ही देश वर्ल्ड मैप पर आया। यहां इंडो-फ्रेंच आर्कियोलॉजिस्ट्स की टीम ने 10 साल खुदाई की और यहां से इंसान की मौजूदगी के अब तक के सबसे पुराने सुबूत मिले।
chandigarh village masol found fosils of human being presence
चंडीगढ़ का अनोखा गांव मसोल
ये सुबूत 26 लाख साल से भी ज्यादा पुराने हैं। इनमें मैमथ की तरह दिखने वाले हाथी जिन्हें स्टैगोडोन कहा जाता है, उसके भी फॉसिल्स मिले हैं। हालांकि, इस रिसर्च के बाद पीएमओ ने आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को इस गांव को एक्वायर करने के लिए कहा था जिसका काम अभी प्रोसेस में है। शिवालिक की पहाड़ियों पर बसे इस गांव में कदम-कदम पर कीमती फॉसिल्स बिखरे पड़े हैं।

 
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chandigarh village masol found fosils of human being presence
चंडीगढ़ का अनोखा गांव मसोल
वहीं फॉसिल्स को चंडीगढ़ के सेक्टर-10 स्थित म्यूजियम में रखा हुआ है। इन्हीं फॉसिल्स को देखने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल चंडीगढ़ आए थे। पर दुर्भाग्य की बात है कि पंजाब सरकार ने इस गांव को पूरी तरह से नजरअंदाज किया हुआ है। गांव तक जाने के लिए आज भी रोड कनेक्टिविटी नहीं है।
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chandigarh village masol found fosils of human being presence
चंडीगढ़ का अनोखा गांव मसोल
गांव को मेन रोड से जोड़ने के लिए पुल बनाने का काम तो शुरू हुआ, लेकिन पिछले करीब एक साल से यहां काम बंद पड़ा हुआ है। इस कारण लोगों को नदी के रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। पानी और बिजली की सप्लाई नहीं है। गांव के निवासी हरनेक सिंह ने बताया कि यहां 72 परिवार रह रहे हैं और ज्यादातर लोग मजदूरी से ही गुजारा कर रहे हैं। यहां नेता सिर्फ इलेक्शन के दिनों में ही आते हैं।
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