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नवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग फलदायी रहेगा, पर भूले से न करना 5 गलतियां, नाराज हो जाएंगी मां
Thu, 04 Apr 2019 02:29 PM IST
kapil sharma
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: kapil sharma
Updated Thu, 04 Apr 2019 02:29 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 6 अप्रैल को हो रहा है। इस नवरात्रि में कई शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे में एक उपाय करना फलदायी रहेगी, बशर्ते कुछ गलतियां ऐसी न हो जाएं कि मां नाराज हो जाएं।
सांकेतिक तस्वीर
नवरात्र के नौ दिन में पांच सर्वार्थ सिद्धि संयोग और तीन रवियोग बन रहे हैं। ऐसे संयोग में देवी साधना के विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह कहना है सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का। मिश्र के मुताबिक, यह नवरात्रि धन और धर्म की वृद्धि के लिए खास रहेगी। इसकी शुरुआत 6 अप्रैल को रेवती नक्षत्र से हो रही है। 7, 9, 10, 12 और 14 अप्रैल को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जबकि 8, 10 और 13 अप्रैल को रवियोग बन रहा है।
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13 अप्रैल को महाष्टमी पर सुबह 11 बजकर 42 मिनट के बाद नवमी तिथि स्मार्त मतानुसार योग होगा। हिंदू धर्म का नया साल चैत्र नवरात्र से शुरू होता है। नवरात्र के दौरान कलश स्थापना के साथ ही मां की पूजा होती है। देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे का कहना है कि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। इसके अलावा पूजा विधि का भी खास ख्याल रखना चाहिए।
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सांकेतिक तस्वीर
कलश स्थापना के मुहूर्त
पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, 6 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 57 मिनट से 11 बजे तक का शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर छह मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक का समय है। नवरात्रि के दिनों में अपनी समर्था के प्रतिदिन नौ कुमारी कन्याओं की पूजा करनी चाहिए। एक कन्या की पूजन से ऐश्वर्य, दो से मोक्ष, तीन से धर्म अर्थ काम, चार की पूजा से राजपक्ष से लाभ, पांच की पूजा से विद्या, छह की पूजा से यंत्र मंत्र तंत्र की प्राप्ति, सात की पूजा से राजपद की प्राप्ति, आठ की पूजा से धन और नौ कन्याओं की पूजन से विजय की प्राप्ति होती है।
पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, 6 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 57 मिनट से 11 बजे तक का शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर छह मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक का समय है। नवरात्रि के दिनों में अपनी समर्था के प्रतिदिन नौ कुमारी कन्याओं की पूजा करनी चाहिए। एक कन्या की पूजन से ऐश्वर्य, दो से मोक्ष, तीन से धर्म अर्थ काम, चार की पूजा से राजपक्ष से लाभ, पांच की पूजा से विद्या, छह की पूजा से यंत्र मंत्र तंत्र की प्राप्ति, सात की पूजा से राजपद की प्राप्ति, आठ की पूजा से धन और नौ कन्याओं की पूजन से विजय की प्राप्ति होती है।
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नवरात्र में देवी पूजा के साथ ही इन उपायों करने से किस्मत खुल जाएगी। नवरात्र पर जरूरतमंद लोगों को भोजन और धन का दान करने से पुराने सभी पापों का बुरा असर कम होता है और पुण्य की बढ़ोतरी होती है। नवरात्र में व्रत करने वाले को केले, आम, पपीता आदि का दान करें। नवरात्र में विशेष रूप से देवी मां के मंत्रों का जाप करना चाहिए। यदि आप चाहें तो दुर्गा शप्तसती का पाठ भी कर सकते हैं। पूजन में साफ-सफाई और पवित्रता व मंत्र जाप में उच्चारण सही होना चाहिए। इस मंत्र की करें स्तुति- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।