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यकीन मानिए, ऐसे तो यहां ‘क्रैश’ हो जाएंगे रेगिस्तानी जहाज

Fri, 08 May 2015 08:57 AM IST
Updated Fri, 08 May 2015 08:57 AM IST
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यकीन मानिए, ऐसे तो यहां ‘क्रैश’ हो जाएंगे रेगिस्तानी जहाज

camel is not safe at population places, exclusive story
रेगिस्तान का जहाज कहलाने वाला ऊंट मैदानी इलाकों में ‘क्रैश’ होने के कगार पर पहुंच गया है। वहां इसके जीवन पर खतरा है। ऐसा हम नहीं, नेशनल रिसर्च सेंटर के आंकड़े बताते हैं। तस्वीरों में देखिए, पूरी रिसर्च। -रिपोर्ट: सुरजीत सत्ती।

यकीन मानिए, ऐसे तो यहां ‘क्रैश’ हो जाएंगे रेगिस्तानी जहाज

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रेगिस्तान का जहाज कहलाते ऊंट के लिए राजस्थान और गुजरात लक्ष्मण रेखा की तरह हैं। इसे पार करते ही उनके लिए खतरा शुरू हो जाता है। शहर के पर्यटन स्थलों पर जो सजे हुए ऊंठ आपको सवारी कराते हैं, वे यहां खतरे में हैं। कारण, रेगिस्तान के अलावा अन्य इलाकों का पर्यावरण ऊंट के अनुकूल नहीं है।

यकीन मानिए, ऐसे तो यहां ‘क्रैश’ हो जाएंगे रेगिस्तानी जहाज

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ऐसे इलाकों में एक ओर उमस के कारण ऊंट सांस की बीमारी का शिकार हो जाते हैं तो दूसरी ओर उन्हें ऐसी वनस्पति भी नहीं मिल पाती जो उनका मुख्य अहार है। इन तथ्यों के मद्देनजर इसी साल फरवरी में नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमल ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में कैमल हसबैंडरी को घाटे का सौदा बताते हुए इसे बंद करने को कहा है।

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सेंटर का मानना है कि इन राज्यों की ओर ध्यान देने के बजाय राजस्थान और गुजरात के हिस्सों में पहले से मौजूद वनस्पति स्त्रोतों की मजबूत करने की जरूरत है। हरियाणा का पर्यावरण ऊंट के अनुकूल नहीं है, पीपल फॉर एनिमल हॉस्पिटल कम शेल्टर फॉर लार्ज एंड स्माल एनिमल्स की ओर से प्रस्तुत की गई ऊंटों की मेडिकल रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

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राजस्थान से उत्तर प्रदेश के लिए कथित तस्करी कर ले जाए जा रहे ऊंट हरियाणा के रेवाड़ी में पकड़े गए और आठ नवंबर 2014 को आई मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया वह सांस की बीमारी (निमोनिया), मानसिक तनाव, कुपोषण, डायरिया और डिहाइड्रेशन से ग्रस्त थे। जिन हालात में उन्हें बांध कर लाया जा रहा था, उसके चलते ऊंटों के मुंह सेे खून निकल रहा था, जबड़े हिले हुए थे और पैरों में घाव थे।

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