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तस्वीरें, बेटियों को बचाने के लिए लड़ाई का ऐलान

Wed, 21 Jan 2015 08:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा) Updated Wed, 21 Jan 2015 08:43 AM IST
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तस्वीरें, बेटियों को बचाने के लिए लड़ाई का ऐलान

beti bachao campaign in haryana

ऐतिहासिक युद्धों की भूमि पानीपत पर चौथी लड़ाई का बिगुल बच गया है। इस बार युद्ध किसी राज या सिंहासन पाने के लिए नहीं, बल्कि बेटियों को सम्मान दिलाने के लिए है। रिफाइनरी में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को लेकर आयोजित कार्यशाला में कई प्रदेशों के जनप्रतिनिधि जुटे। कई प्रदेशों के आला अधिकारियों ने बालिका बचाओ पर जोर दिया और इसके लिए अपनी-अपनी राय दी।

तस्वीरें, बेटियों को बचाने के लिए लड़ाई का ऐलान

beti bachao campaign in haryana

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने भी बेटियों को बेटों के बराबर दर्जा देने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी रहीं। उद्घाटन सत्र के शुभारंभ में प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल भी शामिल रहे।

तस्वीरें, बेटियों को बचाने के लिए लड़ाई का ऐलान

beti bachao campaign in haryana

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, सीएम मनोहर लाल खट्टर और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर स्क्रोल (फोल्डर) का विमोचन किया। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने धरातल और अपने जीवन से जुड़ी बातों को सबके साथ सांझा कर बेटियों को ताकत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेटी नहीं बेटे पराया धन होते हैं।

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beti bachao campaign in haryana

कुछ लोगों का यह भ्रम है कि बेटी पराया धन होती हैं। बेटी मां-बाप के हर सुख-दुख में बेटों से भी आगे हैं। जबकि बेटा अपने गृहस्थ जीवन को ज्यादा महत्व देता है। समाज के लोग इस बात को मानते और समझते हैं। आज की युवा और पढ़ी लिखी पीढ़ी को भी इस बात को समझना और मानना होगा। कई प्रदेशों और जिलों लिंगानुपात खतरे के निशान पर है।

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हर जिले के डीसी को लिंगानुपात को खतरे से ऊपर लाने में जिम्मेदारी निभानी होगी। केंद्रीय मंत्री ने लड़कियों की घटती संख्या के दहेज, सोच और समाज तीन मुख्य कारण बताए और इन तीनों में सुधार करने की बात भी कही।

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