एशियन गेम्स 2018 में गोल्ड मेडल जीतने के बाद पहलवान बजरंग पूनिया पहली बार बोले और बताया कि उन्होंने ये कमाल कैसे कर दिखाया। दिए सफलता के 5 मूलमंत्र...
बजरंग पूनिया ने फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जापान के पहलवान तकातानी डियाची को 11-8 से हराया। इसके साथ ही वे एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के 9वें पहलवान हो गए। भारत ने एशियाई खेलों में अब तक कुल 10 गोल्ड मेडल जीते हैं। करतार सिंह भारत के ऐसे पहलवान हैं, जो दो एशियाई खेलों (1978 बैंकाक और 1986 सियोल) में गोल्ड मेडल जीते चुके हैं। हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर बजरंग को 3 करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की।
18वें एशियाई खेलों में 65 किलो फ्रीस्टाइल कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले बजरंग पूनिया ने अपनी जीत दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित की है। पूनिया ने कहा कि मैं यह स्वर्ण पदक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित करता हूं जिनका हाल ही में निधन हुआ है। उन्होंने इस पदक का श्रेय अपने मेंटर योगेश्वर दत्त को भी दिया, साथ ही मां-बाप का भी आभार व्यक्त किया। साथ ही आगे कैरियर को लेकर बड़ा बयान भी दिया।
ओलंपिक है मेरा टारगेट, वर्ल्ड चैंपियनशिप की जंग भी लड़ेंगे: बजरंग
एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद बजरंग पूनिया ने फोन पर परिजनों से बातचीत की तो वह काफी खुश दिख रहा था। बजरंग ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि वह गोल्ड मेडल जरूर जीतेगा। यह मेडल हर उस देशवासी के लिए है, जिसने उसकी जीत की दुआ की थी और जिसने उस पर गोल्ड मेडल की उम्मीद रखी। बजरंग ने कहा कि अब वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप होनी है, जिसके लिए लगातार जंग जारी रहेगी। यह जंग यही रुकने वाली नहीं है, बल्कि टोक्यो ओलंपिक पर उसकी नजर है और उसका सपना है कि वह ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतकर लाए।
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bajrang puniya
- फोटो : amar ujala
बजरंग पूनिया ने कहा कि खिलाड़ी को दबाव में नहीं रहना चाहिए, चाहे जिंदगी हो या खेल का मैदान। दबाव रहेगा तो अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाएंगे। आखिरी समय तक भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। हमेशा सकारात्मक सोचें और कोशिश करते रहें। निश्चित ही जीत मिलेगी। बजरंग पूनिया ने कहा कि पहले से कोई योजना नहीं बनानी चाहिए। मैदान में जाकर जो भी स्थिति हो, उसी के मुताबिक कर्म करना चाहिए। मैं किसी भी मुकाबले को आसान समझकर नहीं खेलता। हर मैच को मैं एक मुकाबले की तरह लेता हूं। अगर ढिलाई बरतूंगा तो मैच हाथ से निकल जाएगा।