देखिए देश का एक ऐसा अनोखा गांव, जहां का एक भी बच्चा अनपढ़ नहीं है। बच्चों और महिलाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी पढ़ाकू हैं।
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अनोखा गांव, जहां एक भी अनपढ़ नहीं बच्चे-बूढ़े सब पढ़ाकू
ये गांव है हरियाणा के सिरसा जिले का सावंतखेड़ा। इसमें कोई अंगूठा टेक नहीं रहा है। करीब चार साल की कड़ी मेहनत के बाद यह मुकाम मिला है। अब गांव के बुजुर्ग भी हस्ताक्षर कर सकते हैं, यहां तक की अखबार पढ़ सकते हैं। यह प्रदेश का दूसरा ऐसा गांव है, यहां कोई निरक्षर नहीं रहा है। इससे पहले साल 2014 में खंड डबवाली के गांव चकजालू ने यह सफलता अर्जित की थी।
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अनोखा गांव, जहां एक भी अनपढ़ नहीं बच्चे-बूढ़े सब पढ़ाकू
साक्षर भारत मिशन के तहत वर्ष 2012 में निरक्षरों पर एक सर्वे हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग नं. 9 पर स्थित गांव सांवतखेड़ा में निरक्षरों की संख्या करीब 285 थी। निरक्षरों में 108 पुरुष तथा 177 महिलाएं शामिल थीं। प्रेरकों की नियुक्ति के बाद अगस्त 2013 में पहली दफा परीक्षा हुई। जिसमें 8 पुरुष तथा 35 महिलाएं पास हुई।
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मार्च 2014 में हुई परीक्षा में कुल 132 निरक्षरों ने परीक्षा पास करके खुद को साक्षर साबित किया। इसमें 44 पुरुष तथा 88 महिलाएं शामिल थीं। करीब एक साल बाद मार्च 2015 में साक्षर साबित करने के लिए निरक्षरों ने इम्तिहान दिया। कुल 98 निरक्षरों ने परीक्षा पास की। इस बार भी पुरुष के मुकाबले महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। साक्षर साबित करने वालों में 45 पुरुष तथा 53 महिलाएं शामिल थीं।
अगस्त 2015 में लगातार दूसरी परीक्षा हुई। जिसमें पांच पुरुष तथा छह महिलाओं ने परीक्षा पास की। वर्ष 2012 के सर्वे में आए सभी निरक्षर परीक्षा में पास हो गए। लेकिन प्रेरकों ने अपने स्तर पर सर्वे करके 35 ऐसे निरक्षर ढूंढ निकाले, जो बाहर से आकर गांव में बस गए थे। मार्च 2016 में निरक्षरों को ट्रेनिंग देकर परीक्षा में बैठाया गया। जिसमें 16 पुरुष के साथ-साथ 19 महिलाएं भी शामिल थीं। सभी ने परीक्षा पास की।