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एम्स से एमबीबीएस करके डॉक्टर बनना है, तो इन टॉपर्स का फॉर्मूला अपनाइए, रच देंगे इतिहास
Thu, 13 Jun 2019 03:44 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 13 Jun 2019 03:44 PM IST
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एम्स एमबीबीएस की तैयारी आसान नहीं है। डॉक्टर बनने का ख्वाब देखने वाले स्टूडेंट्स टॉपर्स के फॉर्मूला अपनाएंगे तो इतिहास रच सकते हैं। आइए जानते हैं टॉपर्स की सफलता के राज-
एम्स टॉपर चैतन्य
- फोटो : अमर उजाला
हर दिन छह घंटे पढ़ाई करता था
चैतन्य मित्तल को चौथी रैंक हासिल हुई है। उनके पिता डॉ. विनीत मित्तल व मां डॉ. मोनिका मित्तल पेशे से डॉक्टर हैं। उनकी इच्छा थी कि बेटा भी डॉक्टर बने, उसी के मुताबिक मैंने भी तैयारी की। नीट में 261 रैंक मिली थी, लेकिन एम्स में दाखिला चाहिए था, इसलिए और बेहतर तैयारी की। हर दिन 6 घंटे सेल्फ स्टडी की। एलेन कोचिंग का सहारा लिया, जिससे कई टॉपिक क्लियर हुए। अगर डॉक्टर बनना है तो अभी से ही तैयारी शुरू कर दें। सामान्य ज्ञान की तैयारी के लिए अखबार पढ़ें।
चैतन्य मित्तल को चौथी रैंक हासिल हुई है। उनके पिता डॉ. विनीत मित्तल व मां डॉ. मोनिका मित्तल पेशे से डॉक्टर हैं। उनकी इच्छा थी कि बेटा भी डॉक्टर बने, उसी के मुताबिक मैंने भी तैयारी की। नीट में 261 रैंक मिली थी, लेकिन एम्स में दाखिला चाहिए था, इसलिए और बेहतर तैयारी की। हर दिन 6 घंटे सेल्फ स्टडी की। एलेन कोचिंग का सहारा लिया, जिससे कई टॉपिक क्लियर हुए। अगर डॉक्टर बनना है तो अभी से ही तैयारी शुरू कर दें। सामान्य ज्ञान की तैयारी के लिए अखबार पढ़ें।
एम्स टॉपर अमृतेश
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में एडमिशन लेना लक्ष्य
मोहाली निवासी अमृतेश सिंह ग्रेवाल को 12वीं रैंक हासिल हुई है। पिता डॉ. देवेंद्र सिंह और माता डॉ. अमृत कौर पेशे से डॉक्टर हैं। वह निजी प्रैक्टिस करते हैं। सफलता के पीछे परिवार का साथ रहा। अमृतेश कहते हैं कि फिजिक्स में मल्टी टाइप प्रश्नों की बेहतर तैयारी की थी। इसमें स्टूडेंट अकसर कंफ्यूज होते हैं। लंबे प्रश्नों को भी अच्छे से लिखा था। रसायन विज्ञान में भी अच्छे अंक मिले हैं। तैयारी के लिए कम से कम दो साल चाहिए। परीक्षा के समय छह से आठ घंटे पढ़ाई की थी।
मोहाली निवासी अमृतेश सिंह ग्रेवाल को 12वीं रैंक हासिल हुई है। पिता डॉ. देवेंद्र सिंह और माता डॉ. अमृत कौर पेशे से डॉक्टर हैं। वह निजी प्रैक्टिस करते हैं। सफलता के पीछे परिवार का साथ रहा। अमृतेश कहते हैं कि फिजिक्स में मल्टी टाइप प्रश्नों की बेहतर तैयारी की थी। इसमें स्टूडेंट अकसर कंफ्यूज होते हैं। लंबे प्रश्नों को भी अच्छे से लिखा था। रसायन विज्ञान में भी अच्छे अंक मिले हैं। तैयारी के लिए कम से कम दो साल चाहिए। परीक्षा के समय छह से आठ घंटे पढ़ाई की थी।
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एम्स टॉपर कार्तिकेय
- फोटो : अमर उजाला
परिवार-दोस्तों का सपोर्ट और सही तैयारी बेहद जरूरी
हिसार के रहने वाले कार्तिकेय ने 46वीं रैंक हासिल की है। नीट में उन्होंने 246वीं रैंक हासिल की थी। पिता राजकुमार दास शिक्षक हैं। मां शिवानी हाउस वाइफ हैं। मां ने उनकी पढ़ाई में काफी मेहनत की। प्रश्नों की तैयारी करवाती थीं। सात से आठ घंटे तक पढ़ाई की थी। दोस्तों का भी साथ मिला। कार्तिकेय कहते हैं कि एग्जाम के समय सात से आठ घंटे पढ़ाई की थी। एलेन कोचिंग का सहारा लिया था। एक निश्चित योजना के साथ हर रोज पढ़ाई करने से ही सफलता मिलेगी।
हिसार के रहने वाले कार्तिकेय ने 46वीं रैंक हासिल की है। नीट में उन्होंने 246वीं रैंक हासिल की थी। पिता राजकुमार दास शिक्षक हैं। मां शिवानी हाउस वाइफ हैं। मां ने उनकी पढ़ाई में काफी मेहनत की। प्रश्नों की तैयारी करवाती थीं। सात से आठ घंटे तक पढ़ाई की थी। दोस्तों का भी साथ मिला। कार्तिकेय कहते हैं कि एग्जाम के समय सात से आठ घंटे पढ़ाई की थी। एलेन कोचिंग का सहारा लिया था। एक निश्चित योजना के साथ हर रोज पढ़ाई करने से ही सफलता मिलेगी।
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एम्स टॉपर गौतम
- फोटो : अमर उजाला
गौतम कौशल की सफलता का मंत्र रेगुलर पढ़ाई
चंडीगढ़ निवासी राजेंद्र कौशल के बेटे गौतम कौशल ने 54वीं रैंक हासिल की है। नीट में उन्हें 96वीं रैंक मिली थी। गौतम कहते हैं कि दिल्ली एम्स में दाखिला लेने की इच्छा है। परीक्षा के समय ही पढ़ाई नहीं करनी चाहिए, इसके लिए दो से तीन साल पहले पढ़ाई शुरू करनी चाहिए। सामान्य ज्ञान के लिए भी खूब मेहनत की। एनसीईआरटी की पुस्तकों का रेगुलर अध्ययन किया। इस फील्ड में जाने वाले विद्यार्थी ध्यान रखें, रेगुलर पढ़ाई जरूरी है।
चंडीगढ़ निवासी राजेंद्र कौशल के बेटे गौतम कौशल ने 54वीं रैंक हासिल की है। नीट में उन्हें 96वीं रैंक मिली थी। गौतम कहते हैं कि दिल्ली एम्स में दाखिला लेने की इच्छा है। परीक्षा के समय ही पढ़ाई नहीं करनी चाहिए, इसके लिए दो से तीन साल पहले पढ़ाई शुरू करनी चाहिए। सामान्य ज्ञान के लिए भी खूब मेहनत की। एनसीईआरटी की पुस्तकों का रेगुलर अध्ययन किया। इस फील्ड में जाने वाले विद्यार्थी ध्यान रखें, रेगुलर पढ़ाई जरूरी है।