मिलिए उस शख्स से, जिसके पास कभी स्कूल की ड्रेस खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे। आज वो उस मुकाम पर पहुंच गया है कि राष्ट्रपति से पद्मश्री अवार्ड मिला। पढ़ें इनकी सफलता की कहानी, प्रोत्साहन मिलेगा।
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चंडीगढ़ पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. जगतराम
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कई नामचीन हस्तियों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया। इसमें पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. जगत राम भी शामिल रहे। पद्म पुरस्कारों का एलान गणतंत्र दिवस की पूर्ण संध्या पर किया गया था। शनिवार को राष्ट्रपति भवन में इन पुरस्कारों का वितरण किया गया।
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चंडीगढ़ पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. जगतराम
प्रोफेसर जगतराम ने साल 2017 में पीजीआई चंडीगढ़ के डायरेक्टर का पद संभाला था। इससे पहले वे एडवांस आई सेंटर के एचओडी थे। प्रो. जगत राम अब तक 90 हजार लोगों की आंखों की रोशनी लौटा चुके हैं। इनमें दस हजार बच्चे भी शामिल हैं। बता दें कि कुछ ऐसे बच्चे होते हैं, जिनकी आंखों में जन्म से ही दिक्कत होती है, जिस कारण वह देख नहीं पाते। आंखों की रोशनी लौटाने के लिए तकनीक तो मौजूद थी, लेकिन वह इतनी जटिल और महंगी थी कि आम आदमी के लिए इलाज करा पाना मुश्किल था।
प्रो. जगत राम ने इस बाधा को दूर किया और एक नई सर्जिकल तकनीक ईजाद की। इसके अतिरिक्त उन्होंने बच्चों में होने वाली मोतियाबिंद की बीमारी के इलाज के लिए नई तकनीक खोजी। उनकी इन दोनों तकनीक का इस्तेमाल इस समय विश्व के लगभग सभी सर्जन कर रहे हैं। यह तकनीक न सिर्फ सस्ती हैं, बल्कि जटिल से जटिल आंखों की परेशानियों का इलाज करने में सक्षम है। इसके लिए प्रो. जगतराम को विश्व की सबसे बड़ी संस्था अमेरिकन सोसाइटी कैटरेक्ट की ओर से बेस्ट ऑफ दी बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
इस पुरस्कार की उत्कृष्टता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब किसी व्यक्ति को यह अवार्ड दिया जाता है तो उसके सम्मान में अमेरिकी राष्ट्रगान बजाया जाता है। प्रो. जगतराम से पहले पीजीआई के तीन डायरेक्टरों को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा जा चुका है। साल 1987 में प्रो. पीएन चुटानी, साल 2007 में प्रोफेसर केके तलवार, साल 2016 में प्रोफेसर योगेश कुमार चावला और अब प्रोफेसर जगतराम को यह सम्मान मिला है।