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2000 के नकली नोट छापने वाला 'इंजीनियर' आया जेल से बाहर, हिला दिया था देश
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Thu, 02 Feb 2017 09:44 AM IST
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मोहाली में नकली नोट छापने वाले गैंग का मास्टरमाइंड अभिनव वर्मा
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2000 के नकली नोट छापने वाले 'इंजीनियर' भाई बहन जेल से बाहर आ गए हैं। इन्होंने बेहद खतरनाक कारनामा करके पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।
नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
मोहाली में दिसंबर 2016 में 42 लाख की जाली करेंसी के साथ पकड़े गए अभिनव वर्मा व उसकी बहन बिशाखा को मंगलवार को जिला अदालत से जमानत पर मिल गई। दोनों ने अदालत में एक-एक लाख के बान्ड भरे हैं। सूत्रों की मानें तो सोहाना थाना पुलिस को कोर्ट में आरोपियों का चालान 60 दिनों में पेश करना था, लेकिन पुलिस पेश नहीं कर पाई। इसका फायदा उठाकर आरोपियों के वकील ने अदालत में जमानत अर्जी दायर की थी। हालांकि पुलिस ने चालान न पेश होने की बात को नकार दिया है।
नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
जिक्रयोग है कि बचाव पक्ष के वकील पहले दिन से ही पुलिस की कहानी को झूठा बता रहे थे। उन्होंने दलील थी कि पुलिस ने आरोपियों को जीरकपुर से गिरफ्तार किया था। जबकि उनकी लोकेशन बाकरपुर में दिखाई गई थी। इस संबंध में बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में एक अर्जी लगाई थी। साथ ही जीरकपुर के एक होटल से सीसीटीवी की फुटेज लेकर सुरक्षित रखने का फैसला किया था।
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नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि नोटबंदी के दौरान 2000 नए नोट पकड़कर मोहाली पुलिस ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। साथ ही दावा किया गया था कि पकड़े गए आरोपियों के लिंक पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई से हो सकते हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि आरोपियों ने मैसूर की सरकारी कागज मिल से नोट छापने के लिए पेपर हासिल किया था, लेकिन जब जांच हुई तो यह बात भी फर्जी निकली थी।
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42 लाख की जाली करेंसी समेत तीन गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
अभिनव ने एक नामी संस्थान से इंजीनियरिंग की है। उसकी एक कंपनी भी है, जो दिव्यांगों के लिए ब्रेल यंत्र तैयार करती है। वह प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के लिए सम्मानित हो चुका है। बिशाखा उसकी कंपनी में एचआर विभाग में है। पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी ने अपनी कंपनी में डिजिटल प्रिंटर से 2000 का नोट स्कैन कर जाली करेंसी छापे थे। वह तीस फीसदी कमीशन पर लोगों को पुराने नोटों के बदले नए नोट देते थे।