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Pics: जान बचाने को इस कुएं में कूद गए थे लोग, देखकर याद आ जाएगा जलियांवाला बाग नरसंहार

Sat, 13 Apr 2019 05:48 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 13 Apr 2019 05:48 PM IST
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100 years of Jallianwala Bagh massacre rare pictures
फाइल फोटो
13 अप्रैल 1919 को अपनी जान बचाने के लिए लोगों ने कुएं में छलांग लगा दी थी। तस्वीरों में देखिए वो कुआं, जलियांवाला बाग नरसंहार की यादें ताजा हो जाएंगी।
100 years of Jallianwala Bagh massacre rare pictures
फाइल फोटो
आज जलियांवाला बाग नरसंहार को सौ साल हो चुके हैं। 1919 में आज ही के दिन क्रूर अंग्रेज सिपाहियों ने निहत्थे लोगों पर गोलियों बरसा कर 1000 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी थी। मरने वाले इन बेकसूर लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में रोलेट एक्ट, अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों व दो नेताओं सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में एक सभा रखी गई, जिसमें कुछ नेता भाषण देने वाले थे।
100 years of Jallianwala Bagh massacre rare pictures
फाइल फोटो
शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी सैंकड़ों लोग बैसाखी के मौके पर परिवार के साथ मेला देखने और शहर घूमने आए हुए थे। जलियांवाला बाग में सभा की खबर सुन कर लोग वहां जा पहुंचे थे। करीब 5,000 लोग जलियांवाला बाग में इकट्ठे थे। ब्रिटिश सरकार के कई अधिकारियों को यह सभा 1857 के गदर की पुनरावृत्ति जैसी लग रही थी, जिसे न होने देने के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैयार थे। इसके लिए जनरल डायर को जिम्मेदारी दी गई।
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100 years of Jallianwala Bagh massacre rare pictures
फाइल फोटो
जब नेता बाग में पड़ी रोड़ियों के ढेर पर खड़े होकर भाषण दे रहे थे, तभी ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर 90 ब्रिटिश सैनिकों को लेकर वहां पहुंच गया। सैनिकों ने बाग को घेर कर बिना कोई चेतावनी दिए निहत्थे लोगों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। 10 मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। जलियांवाला बाग उस समय मकानों के पीछे पड़ा एक खाली मैदान था। वहां तक जाने या बाहर निकलने के लिए केवल एक संकरा रास्ता था।

 
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100 years of Jallianwala Bagh massacre rare pictures
फाइल फोटो
जब गोलियां चलने लगीं तो लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे, लेकिन उस संकरे रास्ते के अलावा भागने का कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में बने कुएं में कूद गए और देखते ही देखते वह कुआं भी लाशों से पट गया। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है।
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