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दुनिया में आ गई मासूम, पर मां बाप अपनाना नहीं चाहते तो अब क्या होगा नवजात का?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 20 Aug 2017 09:51 AM IST
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Baby Delivery
जन्म तो ले लिया, लेकिन मां बाप अपनाना नहीं चाहते। उसकी शक्ल तक नहीं देखना चाहते और उसे जनने वाली भी खुद एक बच्ची है तो अब नवजात का क्या होगा।
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- फोटो : Baby Physio London
रेप पीड़िता के मां बाप ने अपनाने से इंकार किया
पीड़िता के पिता ने मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखकर बच्चे के गोद लेने की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की है। पत्र में यह भी लिखा है कि बच्ची के भविष्य को देखते हुए वह जन्म लेने वाले बच्चे को स्वीकार नहीं करना चाहता है। उसने यहां तक लिखा कि वह जन्मे बच्चे की शक्ल नहीं देखना चाहता। इस बारे में प्रशासन की ओर से पहले ही बता दिया गया था कि यदि पैरेंट़्स बच्चे को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं तो वे बच्चे के गोद लेने की प्रक्रिया की ओर कदम बढ़ाएंगे।
पीड़िता के पिता ने मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखकर बच्चे के गोद लेने की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की है। पत्र में यह भी लिखा है कि बच्ची के भविष्य को देखते हुए वह जन्म लेने वाले बच्चे को स्वीकार नहीं करना चाहता है। उसने यहां तक लिखा कि वह जन्मे बच्चे की शक्ल नहीं देखना चाहता। इस बारे में प्रशासन की ओर से पहले ही बता दिया गया था कि यदि पैरेंट़्स बच्चे को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं तो वे बच्चे के गोद लेने की प्रक्रिया की ओर कदम बढ़ाएंगे।
new born baby dead
लिंग तक पहचानने के लिए नहीं देखा
डिलीवरी के बाद नवजात के लिंग की पहचान के लिए अस्पताल प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दस साल की बच्ची के पिता ने जन्मे नवजात को अपनाने से इंकार कर दिया था। ऐसी स्थिति में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों को बच्ची दिखाई गई और उन्होंने उसकी गवाही भरी। दरअसल डिलीवरी के बाद जन्मे बच्चे की पहचान के लिए उसके परिजनों को दिखाया जाता है, ताकि बाद में बच्चे के लिंग को लेकर कोई विवाद न हो।
डिलीवरी के बाद नवजात के लिंग की पहचान के लिए अस्पताल प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दस साल की बच्ची के पिता ने जन्मे नवजात को अपनाने से इंकार कर दिया था। ऐसी स्थिति में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों को बच्ची दिखाई गई और उन्होंने उसकी गवाही भरी। दरअसल डिलीवरी के बाद जन्मे बच्चे की पहचान के लिए उसके परिजनों को दिखाया जाता है, ताकि बाद में बच्चे के लिंग को लेकर कोई विवाद न हो।
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ऐसे रखा जाएगा बच्ची का ख्याल
नवजात को अपनाने से मना करने के बाद उसकी परवरिश पर सवाल खड़े हो गए हैं। उसके पेरेंट्स शुक्रवार को अधिकारिक तौर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सरेंडर कर देंगे। उसके बाद कमेटी दो महीने तक पेरेंट्स को समय देगी, ताकि यदि पेरेंट्स का मन बदले तो वह बच्ची को दोबारा से अपने साथ रख सकें। यदि इन दो महीने में पेरेंट्स की ओर से कोई जवाब नहीं आता है तो चाइल्ड वेलफेयर कमेटी नवजात की डिटेल सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स अथॉरिटी में डाल देगा।
नवजात को अपनाने से मना करने के बाद उसकी परवरिश पर सवाल खड़े हो गए हैं। उसके पेरेंट्स शुक्रवार को अधिकारिक तौर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सरेंडर कर देंगे। उसके बाद कमेटी दो महीने तक पेरेंट्स को समय देगी, ताकि यदि पेरेंट्स का मन बदले तो वह बच्ची को दोबारा से अपने साथ रख सकें। यदि इन दो महीने में पेरेंट्स की ओर से कोई जवाब नहीं आता है तो चाइल्ड वेलफेयर कमेटी नवजात की डिटेल सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स अथॉरिटी में डाल देगा।
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गौरतलब है कि नौंवीं कक्षा की छात्रा के साथ उसी स्कूल के एक शिक्षक ने दुराचार किया था।
सेक्टर 15 के आशियाना में रहेगी नवजात
सेक्टर 15 स्थित आशियाना को चंडीगढ़ प्रशासन के समाज कल्याण विभाग की ओर संचालित किया जाता है। यहां पर पहले से ही 107 बच्चे हैं। जिनका पालन पोषण बहुत ही अच्छे तरीके से हो रहा है। अब इस परिवार में एक और बच्ची शामिल हो जाएगी। बच्ची का पालन पोषण आशियाना में रहने वाली हाउस मदर करेगी। आशियाना में कुल 17 हाउस मदर हैं, जो रोटेशन पर मौजूद रहती हैं और बच्चों की देखरेख करती हैं।
सेक्टर 15 स्थित आशियाना को चंडीगढ़ प्रशासन के समाज कल्याण विभाग की ओर संचालित किया जाता है। यहां पर पहले से ही 107 बच्चे हैं। जिनका पालन पोषण बहुत ही अच्छे तरीके से हो रहा है। अब इस परिवार में एक और बच्ची शामिल हो जाएगी। बच्ची का पालन पोषण आशियाना में रहने वाली हाउस मदर करेगी। आशियाना में कुल 17 हाउस मदर हैं, जो रोटेशन पर मौजूद रहती हैं और बच्चों की देखरेख करती हैं।