राम मंदिर: रामायणकाल में माता सीता का जन्म मिथिला के राजा जनक के यहां बैसाख माह की नवमी तिथि को हुआ था। मिथिला की राजधानी का नाम जनकपुर है, तो नेपाल का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां पर जानकी मंदिर स्थित है, जिसकी कलाकृति बेहद अद्भुत है। यह मंदिर माता सीता को समर्पित है, जो एक ऐतिहासिक स्थल है। जनकपुर में माता सीता का जन्म हुआ और उनके विवाह के बाद यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का ससुराल बना।
राम मंदिर: यहां पर कहते हैं माता सीता को दीदी और भगवान राम को जीजा, जानिए आखिर क्या है वजह
मंदिर का निर्माण 1895 ईस्वी में शुरु हुआ और 1911 में पूरा हुआ। इस मंदिर के आसपास 115 सरोवर और कुंड हैं। इसमें गंगा सागर, परशुराम सागर एवं धनुष सागर सबसे अधिक प्रसिद्ध है।
राजपुताना महारानी वृषभभानू कुमारी ने माता सीता के इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के निर्माण में करीब 9 लाख खर्च हुए थे। इसलिए मंदिर को नौलखा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकार बताते हैं कि 1657 ईस्वी में यहां पर माता सीता की सोने की मूर्ती मिली थी।
राम मंदिर: अयोध्या में गूंजे शास्त्रीय भारतीय वाद्ययंत्र के सुर, देश के हर कोने से आए कलाकार
माता सीता का विवाह
बताया जाता है कि भगवान राम और माता सीता का विवाह यहीं पर हुआ था। भगवान राम ने यहीं पर माता सीता से विवाह के लिए स्वयंवर में भगवान शिव का धनुष तोड़ा था। यहां पर मौजूद पत्थर के टुकड़े को धनुष का अवशेष बताया जाता है।
राम मंदिर: पाकिस्तान में है प्रभु राम का खास मंदिर, जहां वनवास के दौरान रुके थे भगवान, जानिए क्या है इतिहास
विवाह मंडप को क्या है मान्यता
मंदिर के प्रांगन में विवाह मंडप मौजूद है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यही वह मंडप है जहां पर माता सीता और भगवान राम का विवाह हुआ था। विवाह मंडप के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। मान्यता है कि यहां पर आने से सुहाग की उम्र लंबी होती है। आसपास के लोग विवाह के अवसर पर यहां से सिंदूर ले जाते हैं। बताया जाता है कि यहां पर माता सीता को लोग दीदी कहते हैं और भगवान राम को जीजा कहते हैं।