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क्यों सिकुड़ रहा है बुध ग्रह? सौरमंडल में सूरज के सबसे पास मची हलचल, विशेषज्ञों की चेतावनी
Sat, 12 Sep 2026 04:22 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Sat, 12 Sep 2026 04:22 PM IST
सार
वैज्ञानिकों ने सूरज के सबसे नजदीकी ग्रह बुध को लेकर हैरान करने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि बुध ग्रह सिकुड़ रहा है। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों ने इसकी वजह क्या बताई है।
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क्यों सिकुड़ रहा है बुध ग्रह? सौरमंडल में सूरज के सबसे पास मची हलचल
- फोटो : AI
विस्तार
सूरज के सबसे नजदीकी ग्रह बुध (Mercury) को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बुध पर आईं झुर्रियों से पता चलता है कि इस ग्रह का आकार पहले बड़ा था, जो अब घट गया है। विशेषज्ञों ने बुध की फटी चुकी सतह पर सिकुड़न के निशान पाए हैं। वैज्ञानिक का कहना है कि यह उभारें और चट्टानी किनारें सिकुड़ने वाली संरचनाएं हैं। उनका कहना है कि कुछ चट्टानी किनारे 1.6 किलोमीटर ऊंचे हो सकते हैं और हो सकता है कि सैकड़ों मील तक फैले हो।
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अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, हमारे सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह बुध सूरज से औसतन 58 मिलियन किमी दूर है और 88 दिनों में सूरज की परिक्रमा पूरी करता है। 4.5 अरब साल पहले गैस और धूल के घूमने से इस पथरीले ग्रह का निर्माण हुआ है। सौर मंडल के शुरुआती दिन उथल-पुथल भरे थे। इनमें सूरज के चारों तरफ घूमने वाली अंतरिक्ष चट्टानें अन्य वस्तुओं से टकराती रहती थी।
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विशेषज्ञों का कहना है कि नए बने ग्रह पहले से ही पहले से ही ज्वालामुखी के लावा की तरह गर्म रहते थे, लेकिन इस तरह की टक्करों से निकलने वाली ऊर्जा से और अधिक गर्मी पैदा होती थी। समय के साथ जैसे-जैसे इन ग्रहों से गर्मी निकलती है, बुध जैसे ग्रहों के अंदरूनी हिस्से सिकुड़ते हैं।
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क्या हुआ नए शोध में खुलासा?
यह नया शोध जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक, टक्करों से निकले मलबे ने शायद यह छिपा गया है कि समय के साथ बुध कितना सिकुड़ा है। बुध के सिकुड़ने की दर को समझने से यह जानकारी मिल सकती है कि ग्रह का विकास कैसे हुआ और इसके रहस्यमयी अंदरूनी हिस्से के बारे में खुलासा हो सकता है। बुध के सिकुड़ने के साथ ही इसकी तरह एक जैसे तरीके से दरारे पड़ी होंगी। जर्मन एयरोस्पेस सेंटर में प्लेनेटरी साइंटिस्ट और स्टडी के मुख्य लेखक गाकू निशियामा ने बताया कि अरबों वर्षों तक हुई टक्करों से बने गड्ढों और मलबे से इनमें से कई दरारें ढक गईं। सूरज के पास होने के कारण बुध का अध्ययन कठिन रहा है।
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कितना सिकुड़ चुका है बुध
शोधकर्ताओं का कहना है कि गणनाओं से खुलासा हुआ है कि ग्रह पहले की सोच से 10 से 30 प्रतिशत अधिक सिकुड़ा हो सकता है या इसकी रेडियस (त्रिज्या) में करीब 11.6 किलोमीटर का बदलाव हुआ हो सकता है। बीते अध्ययन में रेडियस में 1 से 2 किलोमीटर और 7 किलोमीटर तक के बदलाव का सुझाव दिया गया था। ग्रह कितना सिकुड़ चुका है इसकी गणना करने से बुध के कोर और ग्रह के ठंडे होते समय अंदर कौन सी घटनाएं हुईं, इस बारे में पता चला सकता है। बुध का ज्यादा सिकुड़ना इस बात का संकेत हो सकता है कि उसके मेटल कोर का आकार अपेक्षाकृत बड़ा था, उसमें सिलिकॉन जैसे हल्के तत्वों की मात्रा कम थी या उसके शुरुआती दौर में तापमान काफी अधिक रहा होगा।