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Holi 2021: सूफी मठों में भी जमकर मनाई जाती थी होली, कुछ इस तरह से होती थी तैयारी

Sun, 28 Mar 2021 06:06 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sun, 28 Mar 2021 06:06 PM IST
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Holi 2021 celebration of festival during mughal era in indian way
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह एक ऐसा त्योहार है, जो समाज में सभी लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस त्योहार का जिक्र मुगल शासन काल में भी मिलता है। इतिहासकार मुंशी जकाउल्लाह ने अपनी किताब तारीख-ए-हिंदुस्तानी में लिखा है कि कौन कहता है, होली हिंदुओं का त्योहार है! होली त्योहार का वर्णन करते हुए जकाउल्लाह कहते हैं कि हिंदुओं को होली खेलते देखकर बाबर भी हैरान हो गए थे।

Holi 2021 celebration of festival during mughal era in indian way
अकबर - फोटो : फाइल फोटो

अकबर के शासनकाल में होली
आइन-ए-अकबरी में अबुल फजल लिखते हैं कि बादशाह अकबर को होली खेलने का काफी शौक था। इसके लिए वे सालभर ऐसी तरह-तरह की चीजें जमा करते थे, जिनसे दूर तक रंगों का छिड़काव किया जा सके। होली के दिन अकबर अपने किले से बाहर आते थे और आम-ओ-खास सबके साथ होली खेला करते थे।

Holi 2021 celebration of festival during mughal era in indian way
मुगल बादशाह जहांगीर - फोटो : सोशल मीडिया

जहांगीर की होली
तुजक-ए-जहांगीरी में जहांगीर की होली की बात मिलती है। होली के दिन गीत-संगीत के रसिया जहांगीर संगीत की महफिलों का आयोजन करते थे। इस महफिल में कोई भी आ सकता था। हालांकि, जहांगीर प्रजा के साथ बाहर आकर होली नहीं खेलते थे। वे लाल किले के झरोखे से ही सारे आयोजन देखते थे। जहांगीर के शासन काल में होली को ईद-ए-गुलाबी और आब-ए-पाशी नाम दिए गए।

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शाहजहां - फोटो : सोशल मीडिया

शाहजहां की होली
शाहजहां के दौर में होली उस जगह पर मनाई जाती थी, जहां आज राजघाट है। होली के दिन शाहजहां प्रजा के साथ रंग खेलते थे। बहादुर शाह जफर, तो इसमें और आगे निकल गए और उन्होंने होली को लाल किले का शाही उत्सव बना दिया। इस त्योहार को लेकर जफर ने गीत भी लिखे, जिसे होरी नाम दिया गया। जफर का लिखा एक होरी गीत यानी फाग आज भी होली पर खूब गाया जाता है, 'क्यों मो पे रंग की मारी पिचकारी, देखो कुंवरजी दूंगी मैं गारी।'

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

इतिहासकारों के मुताबिक, मुगल शासकों के दौर में होली के लिए विशेष रंग तैयार किए जाते थे। लाल बौराए टेसू के फूलों को इकट्ठा कर उन्हें उबालकर ठंडा करके पिचकारियों या हौद में भरा जाता था। बता दें कि हरम (जहां मुस्लिम रानियां रहा करतीं) में भी पानी की बजाए हौदों में फूलों का रंग या गुलाबजल भर दिया जाता था और सुबह से ही होली का जश्न शुरू हो जाता था।

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