Asteroid News: एस्टेरॉयड को काफी लंबे समय से धरती के लिए खतरा बताया जाता है। दुनियाभर के वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर धरती से एस्टेरॉयड टकराता है, तो बड़ी तबाही मच सकती है। कहा जाता है कि एक बार धरती से एस्टेरॉयड टकराया था, जिसके बाद डायनासोर खत्म हो गए थे। अब फिर कुछ सालों में धरती की तरफ बड़ी तबाही आ रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक एस्टेरॉयड धरती के करीब आ रहा है, जो 305 मीटर चौड़ा है। इसका नाम मिस्र के विनाश के देवता एपोफिस के नाम पर रखा गया है।
Asteroid News: खतरे में धरती! पृथ्वी के करीब आ रही है तबाही, इस खतरनाक एस्टेरॉयड पर इसरो की नजर
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उन्होंने कहा कि मानवता के लिए यह एस्टेरॉयड के साथ काम करने का एक अवसर है। भारत को इस तरह कोशिशों का हिस्सा बनना चाहिए। अभी यह तय करना है कि भारत किस तरह हिस्सा लेगा। कहा जाता है कि एस्टेरॉयड टाइम कैप्शूल हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शुरुआती दुनिया के अवशेष हैं। हमारी दुनिया का निर्माण कैसे हुआ उसे समझने में इससे मदद मिल सकती है।
क्या एस्टेरॉयड की धरती से टक्कर होगी?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह एस्टेरॉयड 13 अप्रैल 2029 को धरती के सबसे पास आएगा। इस दौरान इसकी दूरी 48280 किमी होगी। यह 305 मीटर के आकार का है और धरती के करीब होने पर नग्न आंखों से देखा जा सकता है। हालांकि, इसके धरती से टकरान संभवान नहीं है। हालांकि, कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई एस्टेरॉयड धरती के करीब आए।
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वैज्ञानिक इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं। एस्टेरॉयड के माध्यम से सौर मंडल और उल्कापिंडों से धरती को बचाने वाले तरीके का अध्ययन करेंगे। नासा बीते साल ओसाइरिस रेक्स मिशन के तहत उल्कापिंड का सैंपल लाया है। अब वह इस एस्टेरॉयड को लेकर भी मिशन चला सकता है। इससे जुड़े कॉन्सेप्ट दिए जा रहे हैं। जिसके मुताबिक लगभग दो महीने तक इसकी स्टडी शामिल है।
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क्या होगा इसरो का मिशन?
इसरो चीफ ने मिशन से जुड़ी योजना के बारे बताया कि इसमें JAXA (जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी), ESA (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी), और नासा के संयुक्त एस्टेरॉयड एपोफिस मिशन पर एक उपकरण लगाया जा सकता है। या हम किसी तरह से सहायता प्रदान करके इसमें शामिल हो सकते हैं। हमें मिशन में भाग लेने और सीखने के लिए जो भी सहायता हो सके प्रदान करनी चाहिए।