Ajab-Gajab: भारत में शादी दो शरीरों, आत्माओं और परिवारों का मिलन होता है। शादी एक पवित्र बंधन है और जीवन भर सुख-दुःख मे प्रेम, विश्वास और समर्पण के साथ संकल्प से बना एक पवित्र बंधन है। विवाह भारत में एक त्योहार की तरह होता है। यहां पर शादी को लेकर कुछ नियम हैं। कुछ समुदायों में अपने ही चचेरे भाई-बहनों से शादी की इजाजत है, जबकि कई समुदायों में चचेरे भाई या बहन से शादी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। एक ही परिवार में विवाह न करने की कई वैज्ञानिक वजहे भी हैं।
Ajab-Gajab: दक्षिण भारत में अपने ही चचेरे-ममेरे भाई-बहनों से लोग कर रहे शादी? जानिए आखिर क्या है वजह
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में सबसे अधिक 28 फीसदी कजिन मैरिज हुए हैं। इसके बाद कर्नाटक में 27 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 26 फीसदी, पुडुचेरी में 19 फीसदी और तेलंगाना में 18 फीसदी अपने ही परिवार में शादियां हुई हैं। दक्षिण भारत का केरल अकेला ऐसा राज्य है, जहां कजिन मैरिज राष्ट्रीय औसत से काफी कम यानी सिर्फ 4.4 फीसदी है।
क्या है सजातीय विवाह?
सजातीय विवाह में लड़का और लड़की के एक ही पूर्वज होते हैं। पूरी दुनिया में अपने ही परिवार में शादी करने की कोई परंपरा नहीं है। हालांकि इस्लामिक रीति रिवाज को फॉलो करने वाले देश सऊदी अरब, अफगानिस्तान, लीबिया, पाकिस्तान जैसे देशों में इस तरह की शादियां देखने को मिलती हैं।
दक्षिण भारत में क्यों बढ़ रहा यह चलन?
मुस्लिम समुदाय में कजिन विवाह की शुरुआत अपने कबीलों को मजबूत रखने और अपनी संपत्ति को परिवार के अंदर रखने के लिए ही की गई थी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, समाजशास्त्री आर इंद्रा ने एक आर्टिकल में बताया है कि दक्षिण भारत में कजिन मैरिज बढ़ने की बड़ी वजहे हैं।
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जाति
समाजशास्त्री आर इंद्रा के मुताबिक, अधिकतर लोग अपनी ही जाति में शादी करना चाहते हैं। इसकी वजह से वह अपने ही घर के बच्चों या दूर के किसी रिश्तेदार की बेटी या बेटे से अपने बच्चों की शादी कर देते हैं।
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