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Flood: नालंदा में लोकाइन और जिरायन नदी का जलस्तर बढ़ा; बाढ़ से दर्जनों गांव प्रभावित, हजारों एकड़ फसल बर्बाद

Wed, 18 Sep 2024 02:19 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 18 Sep 2024 02:19 PM IST
सार

Flood: नालंदा में लोकाइन और जिरायन नदी का जलस्तर बढ़ा; बाढ़ से दर्जनों गांव प्रभावित, हजारों एकड़ फसल बर्बाद
Nalanda: Lokain and Jirayan rivers Water level increased; Dozens of villages affected by flood crops destroyed
 

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Nalanda: Lokain and Jirayan rivers Water level increased; Dozens of villages affected by flood crops destroyed
बाढ़ ने अस्त व्यस्त किया ग्रामीणों का जीवन - फोटो : अमर उजाला
नालंदा जिले में लोकाइन और जिरायन नदियों के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि से कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बाढ़ के कारण लगभग 1,000 एकड़ से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। यह स्थिति उस समय उत्पन्न हुई जब झारखंड में भारी बारिश के बाद इन नदियों का जलस्तर बढ़ा, जिससे नालंदा के कई प्रखंडों में तबाही मच गई।

 
प्रभावित क्षेत्र और गांवों की स्थिति
नालंदा जिले के पश्चिमी हिस्से से बहने वाली लोकाइन नदी ने एकंगरसराय, हिलसा और करायपरसुराय प्रखंडों में तबाही मचाई है। नदी के उफान से दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिसमें धुरी बीघा, सोहरापुर, जमुआरा, छियासठ बीघा, रसलपुर, दामोदरपुर, गोसाईपुर, मिर्जापुर, और अन्य गांव शामिल हैं। इन गांवों के खेतों और खलिहानों में पानी भर गया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
 
वहीं, जिरायन नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण बिन्द प्रखंड के कथराही गांव के मिल्की खंधा में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। लगभग 720 बीघा भूमि में लगी फसल पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, हर बार जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो बांध कटाव करता हुआ खेतों में पानी घुसा देता है, जिससे फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाती हैं।
 
 
Nalanda: Lokain and Jirayan rivers Water level increased; Dozens of villages affected by flood crops destroyed
बाढ़ ने अस्त व्यस्त किया ग्रामीणों का जीवन - फोटो : अमर उजाला

फसलें और ग्रामीणों की समस्याएं
किसानों के लिए यह बाढ़ विनाशकारी साबित हुई है। हिलसा अनुमंडल के किसान सत्येंद्र प्रसाद ने बताया कि लोकाइन नदी के बांध में कटाव होने से जमुआरा गांव के आसपास लगभग 400 बीघा भूमि की फसलें पानी में डूब गईं। इसी प्रकार, कथराही गांव निवासी भोला मिस्त्री ने कहा कि रात के समय अचानक नदी का जलस्तर बढ़ा और पानी पुल के ऊपर से बहकर खेतों में प्रवेश कर गया। इस घटना में लगभग 720 बीघा भूमि में लगी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।
 
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि नदी पर बने पुल के नीचे फाटक नहीं लगाए गए हैं, जिसके चलते पानी की निकासी का सही इंतजाम नहीं हो पाता है। इस कारण जब भी नदी में जलस्तर बढ़ता है, तब बांध का कटाव हो जाता है और पानी सीधे खेतों में चला जाता है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है।
 
पड़ोसी राज्य झारखंड में हुई बारिश बनी संकट
जानकारी के मुताबिक, इस बाढ़ की मुख्य वजह पड़ोसी राज्य झारखंड में हाल ही में हुई भारी बारिश है। बरसाती नदियों में अचानक से जलस्तर बढ़ने के कारण नालंदा की लोकाइन और जिरायन समेत अन्य नदियां भी उफान पर आ गईं। हालांकि अन्य नदियों की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लोकाइन और जिरायन नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।
 

Nalanda: Lokain and Jirayan rivers Water level increased; Dozens of villages affected by flood crops destroyed
बाढ़ ने अस्त व्यस्त किया ग्रामीणों का जीवन - फोटो : अमर उजाला

नदियों का वर्तमान जलस्तर
सकरी नदी: 79.90 मीटर बेड लेवल, 80.95 मीटर पानी का फ्लो
पैमार नदी: 64.80 मीटर बेड लेवल, 64.85 मीटर पानी का फ्लो
पंचाने नदी: 53.25 मीटर बेड लेवल, 55.25 मीटर पानी का फ्लो
गोइठवा नदी: 52.17 मीटर बेड लेवल, 56.47 मीटर पानी का फ्लो
जिरायन नदी: 57.92 मीटर बेड लेवल, 61.92 मीटर पानी का फ्लो
सोईयवा नदी: 53.54 मीटर बेड लेवल, 57.84 मीटर पानी का फ्लो
कुंभरी नदी: 56.57 मीटर बेड लेवल, 57.17 मीटर पानी का फ्लो
 
प्रशासन की तत्परता और राहत कार्य
जिला प्रशासन लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहा है। नालंदा के हिलसा अनुमंडल अधिकारी (एसडीओ) प्रवीण कुमार ने बताया कि करायपरसुराय प्रखंड के मकरौता पंचायत के मुसाढ़ी, फतेहपुर और कमरथु गांवों में घरों में पानी प्रवेश कर गया है। वहां पर प्रभावित लोगों के बीच सूखा राशन वितरित किया जा रहा है। कम्युनिटी किचन की भी शुरुआत की गई है, जिससे बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध हो सके।
 
साथ ही, बांधों के कटाव वाले क्षेत्रों की मरम्मत के लिए भी युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर दिनेश चौधरी ने कहा कि मिल्की खंधा में हुए कटाव को रोकने के लिए कर्मियों को तुरंत लगा दिया गया है। प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि जल्द से जल्द बाढ़ का पानी निकाला जाए और स्थिति सामान्य हो।
 

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बाढ़ ने अस्त व्यस्त किया ग्रामीणों का जीवन - फोटो : अमर उजाला

किसानों की उम्मीद और चिंता
लगातार दूसरी बार आई बाढ़ ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। किसान अभी पहली बाढ़ से हुए नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि एक महीने के भीतर फिर से उन्हें यह संकट झेलना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि अगर जल निकासी का उचित इंतजाम नहीं किया गया तो उनकी मेहनत बर्बाद होती रहेगी और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।
 
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और कटाव क्षेत्रों की मरम्मत करने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन किसानों और ग्रामीणों को डर है कि अगर जलस्तर यूं ही बढ़ता रहा, तो और भी बड़ी तबाही मच सकती है।

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