भारतीय रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए अपनी तैयारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से लगातार मॉक ड्रिल आयोजित कर रहा है। हाल ही में मुंगेर के जमालपुर यार्ड में मालदा रेलमंडल प्रशासन द्वारा एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें पैसेंजर ट्रेन के डिरेल होने के बाद राहत और बचाव कार्यों की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। इस मॉक ड्रिल में लगभग 55 एजेंसियों ने भाग लिया, जिनमें एनडीआरएफ, रेलवे, पुलिस, फायर ब्रिगेड, डॉक्टरों का पैनल और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं शामिल थीं।
Train Accident: रेलगाड़ी का एक कोच दूसरे कोच के ऊपर चढ़ा, 40 लोग घायल; हादसे की जगह यह था मॉक ड्रिल
Bihar Train Derail: डीआरएम मनीष गुप्ता ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक घटनाओं के समय किए गए ऑपरेशनों का अनुकरण करना था। ऐसे मॉक ड्रिल से विभिन्न विभागों के बीच संचार कौशल और समन्वय को बेहतर बनाने का मौका मिलता है।
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मॉक ड्रिल के दौरान हुआ हादसा
मॉक ड्रिल में जमालपुर से भागलपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को डिरेल कर दिखाया गया, जिसके परिणामस्वरूप हादसे में 40 लोग घायल हो गए। घटनास्थल पर जैसे ही यह हादसा हुआ, सूचना फैलते ही एनडीआरएफ और रेलवे की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। कोचों में फंसे यात्रियों को कटर से काटकर निकाला गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह था कि रेलवे प्रशासन यह सुनिश्चित कर सके कि किसी भी दुर्घटना के समय किस एजेंसी का रिस्पॉन्स टाइम क्या है। ताकि भविष्य में किसी भी आपातकालीन स्थिति में सभी एजेंसियां त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दे सकें।
मॉक ड्रिल की प्रक्रिया
मॉक ड्रिल में कई महत्वपूर्ण कदम शामिल थे, जैसे मलबा हटाना, फंसे हुए यात्रियों को बाहर निकालना, घायलों को प्राथमिक चिकित्सा देना, घायलों को अस्पताल भेजना, भोजन और अन्य राहत सामग्री की आपूर्ति करना, अनुग्रह राशि का भुगतान करना, यात्रियों के सामान की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करना।
डीआरएम ने बताया मॉक ड्रिल का उद्देश्य
मॉक ड्रिल के दौरान मौके पर मौजूद डीआरएम मनीष गुप्ता ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक घटनाओं के समय किए गए ऑपरेशनों का अनुकरण करना था। उन्होंने बताया कि ऐसे मॉक ड्रिल से विभिन्न विभागों के बीच संचार कौशल और समन्वय को बेहतर बनाने का मौका मिलता है। मनीष गुप्ता ने कर्मचारियों से यह भी आग्रह किया कि वे किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहें और सतर्क रहें।
उन्होंने आगे कहा कि इस मॉक ड्रिल का आयोजन रेलवे के विभिन्न विभागों और अन्य एजेंसियों के बीच संचार और समन्वय में मौजूद खामियों की पहचान करने के लिए किया गया था। ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना के दौरान इन खामियों को दूर किया जा सके और तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सके।