आज कल कार कंपनियां साल में दो बार से ज्यादा कीमतें बढ़ाने लगी हैं। इस वजह से सस्ते कार मॉडल भी अब महंगे हो गए हैं। वहीं, कंपनियां अपना मार्जिन बढ़ाने और खर्च बचाने के लिए गाड़ियों में कुछ फीचर्स को गायब करती जा रही हैं या उन्हें अपग्रेड नहीं कर रही हैं। कॉस्ट कटिंग से कंपनियों को मुनाफा होता है, लेकिन कस्टमर को ये फीचर बाहर से लगवाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। यहां हम आपको कुछ ऐसे जरूरी फीचर्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें कंपनियां न देकर अपना खर्च कम कर रही हैं।
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क्लैडिंग हो रही गायब
- फोटो : Suzuki
क्लैडिंग हो रही गायब
आजकल की कारों में व्हील क्लैडिंग गायब हो रही है जो प्लास्टिक की होती है। व्हील क्लैडिंग कार के केबिन में होने वाले शोर को कम करता है, लेकिन इसे न देकर कंपनियां कॉस्ट कटिंग कर रही हैं। यह एक जरूरी फीचर है और ड्राइविंग को कंफर्टेबल बनाता है। मारुति अल्टो, टाटा टियागो, रेनो क्विड जैसे कई कारों के बेस मॉडल में अब व्हील क्लैडिंग नहीं मिलता है।
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रियर वाइपर
- फोटो : Maruti Suzuki
रियर वाइपर
कई किफायती कारों को देखें तो इनमें रियर वाइपर नहीं होते। यहां तक की महंगी कारों के भी बेस मॉडलों में कंपनियां रियर वाइपर नहीं देती। फ्रंट की तरह ही रियर वाइपर भी कार में बेहद जरूरी फीचर है। भारी बारिश में यह पीछे की विजिबिलिटी को बेहतर बनाने में मदद करता है।
वन-टच अप-डाउन विंडो
आजकल कारों में कई फीचर ऑटोमैटिक हो गए हैं। सिर्फ एक बटन दबाते हैं सनरूफ खुल जाता है और बंद भी हो जाता है। एक बटन दबाकर आप कार की सीटों को भी सेट कर सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद कंपनियां वन-टच में ऑपरेट होने वाली विंडोज नहीं दे रही हैं। वन-टच सिस्टम से आपको खिड़कियों को ऊपर या नीचे करने के लिए बटन दबाकर नहीं रखना पड़ता।
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हैलोजन केबिन लाइट
- फोटो : AI
हैलोजन केबिन लाइट
आज भले ही कार के हेडलाइट और टेल लाइट पूरी तरह एलईडी (LED) में आ रहे हों, लेकिन कई कारों में केबिन लाइट बल्ब हैलोजन में ही दिए जा रहे हैं। ये लाइट कार को अंदर से थोड़ी पुरानी फील कराते हैं।