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Electric Vehicles: भारतीय ईवी बाजार में बड़े पैमाने पर हो सकता है चीनी आक्रमण, अध्ययन में किया गया दावा

Mon, 25 Mar 2024 12:32 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 25 Mar 2024 12:32 PM IST
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Push for electric vehicles may result in large-scale entry of Chinese companies into Indian EV market
Electric Car - फोटो : For Reference Only
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा दे रही है। कार्बन न्यूट्रलिटी के अपने लक्ष्य के तहत, भारत सरकार वाहन निर्माताओं को इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जिससे देश के वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के घरेलू मैन्युफेक्चरिंग (विनिर्माण) को बढ़ावा देने की इस कोशिश से चीनी वाहन निर्माताओं की भारतीय घरेलू बाजार में बड़े पैमाने पर एंट्री हो सकती है।
Push for electric vehicles may result in large-scale entry of Chinese companies into Indian EV market
Electric Car - फोटो : For Reference Only
यह निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आए हैं जब वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में चीनी ऑटो कंपनियों का बड़ा बोलबाला है। जो विभिन्न महाद्वीपों में इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों को अपने किफायती उत्पादों के साथ पकड़ने के लिए आक्रामक रूप से कोशिश कर रही हैं, जिन्हें चीन सरकार से पर्याप्त समर्थन हासिल है। अनुमानों के बारे में बात करते हुए, जीटीआरआई ने कहा है कि चीन का ऑटोमोबाइल उद्योग, जो सरकार के पर्याप्त समर्थन से प्रेरित है, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक में तेजी से विकसित हुआ है। जिससे यह ईवी और संबंधित कंपोनेंट्स (घटकों) का एक प्रमुख निर्यातक बन गया है।
Push for electric vehicles may result in large-scale entry of Chinese companies into Indian EV market
Electric Car - फोटो : For Reference Only
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण का केंद्र बनाने के लिए नए सिरे से किए गए नीतिगत प्रयास और निजी क्षेत्र के प्रयासों से चीन से आयात किए जाने वाले व्हीकल कंपोनेंट्स (वाहन घटकों) पर निर्भरता में तेजी से इजाफा होगा। गौरतलब है कि 2022-23 में भारत का वाहन घटक आयात 20.3 अरब डॉलर था और इसमें से लगभग 30 प्रतिशत चीन से आया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, चीन से वाहन घटक आयात में और बढ़ोतरी हो सकती है। क्योंकि ईवी घटकों की वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका कंट्रोल ज्यादा है।
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Leapmotor Electric Car in Jinhua Car Plant - फोटो : Leapmotor
इस समय, दुनिया की बैटरी उत्पादन क्षमता का 75 प्रतिशत चीन के पास है और बैटरी पैक इलेक्ट्रिक वाहन की कुल कीमत का 40 प्रतिशत होते हैं। वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन और दुनिया भर के बाजारों में निर्यात में चीन की का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी है। भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी परिदृश्य के बारे में अनुमान लगाते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ वर्षों में, भारतीय सड़कों पर चलने वाले हर तीसरे इलेक्ट्रिक वाहन और कई यात्री और वाणिज्यिक वाहन चीनी ऑटो कंपनियों द्वारा बनाए हुए हो सकते हैं। ये सीधे चीनी ओईएम द्वारा या भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रमों के जरिए हो सकते हैं।
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जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया लिमिटेड - फोटो : Amar Ujala
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बाजार में एंट्री चीनी कंपनियों को एक बड़ी राहत प्रदान कर सकता है, क्योंकि यूरोपीय संघ और अमेरिका को उनके निर्यात में गिरावट आ रही है। जो सब्सिडी विरोधी जांच और सब्सिडी वाली कारों और ईवी बैटरी के निर्यात पर बढ़े हुए व्यापार प्रतिबंधों के कारण है। दिलचस्प बात यह है कि यह अनुमान JSW MG Motor India (जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया) के आने के बाद आया है, जो चीन की SAIC और भारतीय समूह JSW ग्रुप के बीच एक जॉइन्ट वेंचर (संयुक्त उद्यम) है। जॉइंट वेंचर बनाने वाली इन दोनों कंपनियों ने एलान किया है कि जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया के तहत भारत में स्थानीय रूप से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। साथ ही, कंपनी का लक्ष्य सितंबर 2024 से शुरू होकर हर तीन से छह महीने में भारत में एक नई कार लॉन्च करने का है।
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