भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सेक्टर 2030 तक जिन लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है, उनके लिए कुल 12.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत आंकी गई है। लेकिन एक नई रिपोर्ट के अनुसार अब तक इस जरूरत का सिर्फ 18 प्रतिशत निवेश ही हो पाया है।
EV: 2030 तक भारत के ईवी लक्ष्य के लिए कितनी निवेश जरूरत है? IEEFA रिपोर्ट में बड़े दावे
भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर ने 2020 से 2025 तक 2.23 लाख करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट आकर्षित किया। जो 2030 तक जरूरी अनुमानित कुल इन्वेस्टमेंट का सिर्फ 18% था।
2030 तक ईवी अपनाने का भारत का लक्ष्य क्या है?
भारत सरकार ने अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए ईवी अपनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं-
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निजी कारें: 30 प्रतिशत
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कमर्शियल वाहन: 70 प्रतिशत
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बसें: 40 प्रतिशत
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दो और तीन पहिया वाहन: 80 प्रतिशत
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए EV मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्टिंग इकोसिस्टम में बड़े स्तर पर पूंजी निवेश जरूरी है।
निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा किन क्षेत्रों में गया?
2020–25 के दौरान EV इकोसिस्टम के तीन मुख्य हिस्सों में निवेश हुआ-
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मैन्युफैक्चरिंग क्षमता: सबसे बड़ा हिस्सा
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सरकारी सब्सिडी और इंसेंटिव
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ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
रिपोर्ट के अनुसार, ईवी मैन्युफैक्चरिंग में हुए निवेश में
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1.59 लाख करोड़ रुपये आंतरिक स्रोतों से
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36,738 करोड़ रुपये कर्ज से
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6,455 करोड़ रुपये इक्विटी से आए।
अलग-अलग EV सेगमेंट में निवेश का ट्रेंड कैसा रहा?
कुल आंकड़े अलग-अलग सेगमेंट की सच्चाई पूरी तरह नहीं दिखाते।
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इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में निवेश का बड़ा हिस्सा आंतरिक फंडिंग और कुछ हद तक कर्ज से आया। क्योंकि इस सेगमेंट में OEM कंपनियां ज्यादा बिखरी हुई हैं।
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वहीं इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर और टू-व्हीलर सेगमेंट, जहां स्थापित कंपनियां मौजूद हैं, वहां फंडिंग का मिश्रण ज्यादा विविध रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, 2020-25 के बीच कुल निवेश का 78 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट को मिला। हालांकि, 2024 और 2025 में निवेश का रुझान तेजी से इलेक्ट्रिक कारों की ओर बढ़ता दिख रहा है।
सरकारी सब्सिडी की क्या भूमिका रही?
ईवी अपनाने को बढ़ावा देने के लिए सरकार की FAME (फेम) योजना और केंद्र व राज्य स्तर की अन्य नीतियों के तहत FY2020-24 के बीच 18,251 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। इससे शुरुआती मांग और बाजार को मजबूती मिली।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़ी कमी कहां है?
ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के मामले में सबसे कमजोर कड़ी बना हुआ है।
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2020 में: 5,151 पब्लिक चार्जर
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2025 में: 39,485 पब्लिक चार्जर
इसके बावजूद, भारत में ईवी के मुकाबले चार्जर का अनुपात वैश्विक मानकों से काफी पीछे है।2030 के लक्ष्य पूरे करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में करीब 20,600 करोड़ रुपये निवेश की जरूरत है। लेकिन 2020-25 के दौरान इसका सिर्फ 9.6 प्रतिशत निवेश ही हो पाया है।
सबसे बड़ी चुनौती अब क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 82 प्रतिशत जरूरी निवेश अब भी नहीं आया है।
अब सबसे बड़ी चुनौती नीतियों की नहीं, बल्कि पूंजी की लागत और फाइनेंसिंग स्ट्रक्चर की है।
कमर्शियल ईवी खरीदने वालों को 15 प्रतिशत से 33 प्रतिशत तक की ब्याज दर चुकानी पड़ती है। जिससे ईवी की कुल लागत का फायदा कम हो जाता है। इसका असर-
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मांग पर
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फ्लीट विस्तार पर
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और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की ग्रोथ पर पड़ता है।
तेजी से निवेश है जरूरत?
अगर भारत को 2030 तक अपने ईवी लक्ष्यों को हासिल करना है, तो सिर्फ नीतिगत समर्थन काफी नहीं होगा। कम ब्याज दर, बेहतर फाइनेंसिंग मॉडल और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में तेज निवेश अब ईवी सेक्टर की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं।