सरकार ने कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) 3 फ्रेमवर्क के तहत एक अहम प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत पूलिंग मैकेनिज्म में मौजूद तीन कार निर्माताओं की सीमा को हटाने का सुझाव दिया गया है। इस बदलाव से ऑटोमोबाइल कंपनियों को ईंधन दक्षता मानकों को पूरा करने में अधिक लचीलापन मिल सकता है। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस प्रस्ताव में पूल के भीतर जुर्माने से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया गया है।
Fuel Efficiency: क्या सरकार CAFE नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है? कार निर्माताओं के लिए नियम होंगे आसान
सरकार ने कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) 3 फ्रेमवर्क के तहत पूलिंग मैकेनिज्म में तीन-मैन्युफैक्चरर की लिमिट हटाने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम से कार बनाने वालों को फ्यूल-एफिशिएंसी टारगेट पूरा करने में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिल सकती है।
CAFE में ‘पूलिंग’ का मतलब क्या होता है?
CAFE नियमों के तहत पूलिंग का अर्थ है कि दो या उससे अधिक कार निर्माता अपनी गाड़ियों के फ्लीट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी आंकड़ों को मिलाकर नियमों का पालन कर सकते हैं। जब कंपनियां एक पूल बनाती हैं, तो उन्हें अनुपालन के लिए एक ही निर्माता माना जाता है और उनकी संयुक्त फ्लीट के आधार पर औसत ईंधन खपत की गणना की जाती है।
पहले क्या नियम था और अब क्या बदला गया है?
सितंबर 2025 के ड्राफ्ट CAFE 3 नियमों में यह प्रावधान था कि अधिकतम तीन निर्माता ही एक पूल बना सकते हैं। लेकिन जनवरी 2026 में जारी नए प्रस्ताव में यह सीमा हटा दी गई है। अब नियम में सिर्फ इतना कहा गया है कि पूल में कम से कम दो निर्माता होने चाहिए, जबकि अधिकतम संख्या तय नहीं की गई है। हालांकि, पूल को अनुपालन के लिहाज से एक निर्माता मानने का नियम पहले जैसा ही रहेगा।
इससे कार कंपनियों को क्या फायदा होगा?
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को हो सकता है जिनकी गाड़ियों का फ्लीट अपेक्षाकृत कम ईंधन-कुशल है। ऐसी कंपनियां उन निर्माताओं के साथ पूल बना सकती हैं जिनके पास ज्यादा क्लीन या फ्यूल-एफिशिएंट पोर्टफोलियो है।
अगर संयुक्त फ्लीट तय मानकों को पूरा करता है, तो सभी कंपनियों को नियमों का पालन करने वाला माना जाएगा। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि वित्त वर्ष 2023 में CAFE नियमों का उल्लंघन करने पर आठ कंपनियों पर करीब 7,300 करोड़ रुपये का कुल जुर्माना लगाया गया था।
सितंबर 2025 के ड्राफ्ट में कहा गया था कि पूल में नामित पूल मैनेजर को ही पेनल्टी का भुगतान करना होगा। लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार, पूल मैनेजर की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की होगी कि पूल में शामिल सभी निर्माता अपनी-अपनी पेनल्टी चुकाएं। इसके अलावा, सभी कंपनियों को संयुक्त और व्यक्तिगत जिम्मेदारी की घोषणा करनी होगी, जिससे सभी सदस्य कानूनी रूप से जवाबदेह रहेंगे।
CAFE नियम किन गाड़ियों पर लागू होते हैं?
CAFE मानकों की निगरानी ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) करता है, जो ऊर्जा मंत्रालय के तहत काम करता है। ये नियम M1 श्रेणी के वाहनों पर लागू होते हैं, जिनमें हैचबैक, सेडान, SUV और MPV शामिल हैं। इन गाड़ियों में ड्राइवर समेत आठ से ज्यादा सीटें नहीं होनी चाहिए और उनका ग्रॉस व्हीकल वजन 3,500 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।
पूलिंग की प्रक्रिया कैसे और कब होगी?
प्रस्ताव के मुताबिक, पूलिंग किसी भी चरण में की जा सकती है और पेनल्टी लगने से पहले अडजुडिकेशन स्टेज पर भी इसे मंजूरी दी जा सकती है। हालांकि, कोई भी निर्माता एक समयावधि में केवल एक ही पूल का हिस्सा बन सकता है, जिसकी न्यूनतम अवधि एक वर्ष होगी। सभी पूलिंग व्यवस्थाओं को BEE के पास रजिस्टर करना होगा और पूल मैनेजर को हर साल 90 दिनों के भीतर संयुक्त अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।