भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में आने वाले चार से पांच वर्षों के दौरान पैसेंजर व्हीकल (PV) और दोपहिया (2W) सेगमेंट के बीच प्रतिस्पर्धा और मुनाफे का अंतर बढ़ सकता है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, पैसेंजर व्हीकल बाजार में नए मॉडल्स की तेज एंट्री प्रतिस्पर्धा और कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है। जबकि दोपहिया बाजार में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तुलनात्मक रूप से संतुलित रहने की संभावना है।
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भारत के ऑटो सेक्टर में बढ़ सकता है मुनाफे का अंतर: रिपोर्ट- यात्री वाहन बाजार में बढ़ेगी गलाकाट प्रतिस्पर्धा!
Thu, 10 Sep 2026 06:04 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Thu, 10 Sep 2026 06:04 PM IST
सार
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की ताजा शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में आने वाले 4 से 5 वर्षों के दौरान दो अलग-अलग रुझान देखने को मिलेंगे। जानें क्या हैं रिपोर्ट की खास बातें।
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Passenger Vehicle Market Competition
- फोटो : Amar Ujala
Car Showroom
- फोटो : AI
पैसेंजर व्हीकल बाजार में प्रतिस्पर्धा क्यों बढ़ सकती है?
- जेफरीज के मुताबिक, भारतीय पैसेंजर व्हीकल उद्योग अगले चार से पांच वर्षों में एक तेज प्रोडक्ट साइकल की ओर बढ़ रहा है। देश की शीर्ष चार कार निर्माता कंपनियां मिलकर इस अवधि में करीब 35 नए मॉडल या नेमप्लेट पेश करने की योजना बना रही हैं।
- खास तौर पर SUV सेगमेंट में लगातार नए मॉडल आने से बाजार में विकल्प बढ़ेंगे। रिपोर्ट का अनुमान है कि मांग मजबूत रहने के बावजूद नए मॉडल्स की लगातार एंट्री से कीमतों और बाजार हिस्सेदारी को लेकर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव ऊंचा रह सकता है।
क्या पैसेंजर व्हीकल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव दिखने लगा है?
- जेफरीज ने जून तिमाही के प्रदर्शन को दोनों सेगमेंट के बीच उभरते अंतर का उदाहरण बताया है।
- रिपोर्ट में शामिल दोपहिया कंपनियों की संयुक्त बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि उनका EBIT यानी ब्याज और कर से पहले का मुनाफा 39 प्रतिशत बढ़ा।
- इसके विपरीत, पैसेंजर व्हीकल कंपनियों की बिक्री मात्रा 25 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन EBIT में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
- इससे संकेत मिलता है कि जून तिमाही में दोपहिया कंपनियां अपनी बढ़ी हुई बिक्री को परिचालन मुनाफे में बदलने में पैसेंजर व्हीकल कंपनियों की तुलना में बेहतर रहीं।
Royal Enfield Himalayan 440
- फोटो : Royal Enfield
अगले कुछ वर्षों में यह अंतर क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?
- जेफरीज का मानना है कि पैसेंजर व्हीकल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ यह अंतर ऑटो सेक्टर की एक महत्वपूर्ण विशेषता बना रह सकता है।
- नई उत्पादन क्षमता आने और वैश्विक तथा घरेलू कंपनियों की संभावित विस्तार योजनाओं से बाजार में प्रतिस्पर्धा करने वाले मॉडलों की संख्या और बढ़ सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर SUV सेगमेंट में दिखाई देने की संभावना है, जहां कंपनियां लगातार नए उत्पाद पेश कर रही हैं।
दोपहिया बाजार में प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत संतुलित क्यों है?
- इसके मुकाबले दोपहिया बाजार का प्रतिस्पर्धी माहौल ज्यादा अनुशासित और तर्कसंगत बना हुआ है। जेफरीज के अनुसार, दोपहिया निर्माता केवल बिक्री बढ़ाने पर निर्भर रहने के बजाय मुनाफे को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में किसी बड़े नए वैश्विक दोपहिया निर्माता के प्रवेश का जोखिम फिलहाल सीमित है, क्योंकि दुनिया की ज्यादातर बड़ी अंतरराष्ट्रीय दोपहिया कंपनियां पहले से ही भारतीय बाजार में मौजूद हैं।
- इस वजह से बाजार में अचानक बड़े पैमाने पर नई प्रतिस्पर्धा आने की संभावना अपेक्षाकृत कम है।
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Bajaj Chetak 3001 Electric Scooter
- फोटो : Chetak
इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में क्या बदलाव दिख रहा है?
- रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार भी धीरे-धीरे अधिक स्थिर होता दिखाई दे रहा है। मौजूदा प्रमुख निर्माता अभी भी बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनाए हुए हैं और EV की बढ़ती हिस्सेदारी के बावजूद मुनाफा कायम रखने में सफल रहे हैं।
- जेफरीज ने यह भी कहा कि कंपनियों के इंटरनल-कंबशन-इंजन (ICE) पोर्टफोलियो में कीमतों को लेकर अनुशासन ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ते बदलाव के असर को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद की है।
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Car Showroom
- फोटो : AI
क्या पैसेंजर व्हीकल बाजार में लंबे समय की ग्रोथ की संभावना ज्यादा है?
- जेफरीज के अनुसार, भारत में कारों की अपेक्षाकृत कम पहुंच को देखते हुए पैसेंजर व्हीकल बाजार लंबे समय में बड़ा ग्रोथ अवसर पेश करता है।
- हालांकि, रिपोर्ट का आकलन है कि मौजूदा प्रतिस्पर्धी माहौल के लिहाज से दोपहिया बाजार कंपनियों के लिए अधिक अनुकूल है। प्रीमियम मोटरसाइकिल, स्कूटर और इलेक्ट्रिक मॉडल आने वाले समय में दोपहिया कंपनियों को लगातार विकास के अवसर दे सकते हैं।
- कुल मिलाकर, रिपोर्ट भारत के ऑटो सेक्टर में एक स्पष्ट अंतर की ओर इशारा करती है। जहां पैसेंजर व्हीकल बाजार में नए उत्पादों की तेज रफ्तार प्रतिस्पर्धा और मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकती है, वहीं दोपहिया बाजार में अपेक्षाकृत संतुलित प्रतिस्पर्धा कंपनियों के लिए बेहतर लाभप्रदता का आधार बनी रह सकती है।