सुंदर कांड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। सुंदर कांड तुलसीदास जी द्वारा रचित है, परंतु इसमें वाल्मिकी रामायण के सोपान सीता और हनुमान भेंट के समय का वर्णन किया गया है। रामायण का यही एक ऐसा अध्याय है, जिसमें हनुमान जी को मुख्य दिखाया गया है। सुंदर कांड का विशेष महत्व माना जाता है। इस कांड में माता सीता और हनुमान जी की भेंट का सुंदर वर्णन किया गया है, इस मुख्य घटना के कारण ही इस कांड का नाम सुंदरकांड रखा गया है। जानतेहैं सुंदरकांड के लाभ और नियम...
सुंदर कांड का पाठ करने से कार्यो में मिलती है सफलता, जानें इसे करने के नियम
सुंदर कांड में हनुमान जी के बल और विजय का वर्णन किया गया है। इसलिए इस कांड का पाठ करने से मनुष्य को भय से मुक्ति मिलती है। जिससे उसका आत्मविश्वास मजबूत होता है। इस कांड का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा शीघ्र ही होती है।
सुंदर कांड के पाठ में माता सीता की खोज करके हनुमान जी की सफलता का वर्णन है, इसलिए सफलता प्राप्ति के लिए भी इस कांड का पाठ किया जाता है। इस कांड का पाठ करने से बिगड़ते हुए काम भी बनने लगते हैं। विपरीत स्थितियों में भी सुंदर कांड के पाठ से लाभ होता है।
सुंदर कांड का पाठ आध्यात्मिक और मानसिक शांति देने वाला है। इस पाठ को करने से आपको मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। जिसके कारण आप कोई भी कार्य अपनी बुद्धि के बल पर करने के लिए सक्षम हो पाते हैं।
सुंदर कांड के पाठ की विधि
सुंदर कांड का पाठ करने के लिए एक स्वच्छ स्थान पर पटरी लेकर उस पर हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें हनुमान जी को पुष्प आदि चढ़ाए। उसके बाद गणेश जी भगवान श्री राम, हनुमान जी और शिव जी का ध्यान करके आवाह्न करें। चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी का तिलक करें। उसके बाद हनुमान जी के चरणों में पीपल के सात पत्ते रखें। हनुमान जी के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। ये दीपक पूरे सुंदर कांड के समय जलते रहना चाहिए। तत्पश्चात पाठ आरंभ कर दें। पाठ के समापन के बाद हनुमान जी और राम जी की आरती करें उनको बूंदी या फिर गुड़ चना का भोग लगाकर लोगों में वितरित करें।