सनातन धर्म में प्रातःकाल और संध्याकाल का समय भगवान की भक्ति और पूजा के लिए बताया गया है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य के अपने इष्ट का ध्यान अवश्य करना चाहिए। हर धर्म को लोग ईश्वर को मानते हैं चाहें उनका भक्ति करने का तरीका अलग ही क्यों न हो। हिंदू सनातन धर्म में देवी-देवताओं की मूर्ति स्वरुप में पूजा की जाती है। मंदिर चाहें घर में हो या बाहर वह आस्था का केंद्र होता है। जहां पर मनुष्य अपने इष्ट का ध्यान करता है लेकिन पूजा करने के साथ भी कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है अगर आप इन बातों को ध्यान में नहीं रखते हैं, तो आपकी सारी पूजा व्यर्थ जाती है। आपको पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
इन चार कार्यों के बिना व्यर्थ है सारी पूजा-पाठ, नहीं मिलती है देवी-देवताओं की कृपा
सनातन धर्म मानने वाले प्रत्येक घर में एक छोटा सा पूजा का स्थान अवश्य बना होता है जहां पर ईश्वर की पूजा की जाती है। इस स्थान पर देवी-देवता विराजते हैं, इसलिए इस स्थान का पवित्र होना आवश्यक होता है। अगर आप पूजा नहीं भी कर पाते हैं तो भी नियमित रुप से मंदिर की सफाई करनी चाहिए।
घर की रसोई एक ऐसा स्थान है, जहां पर सभी का भोजन बनता है। इसलिए इस स्थान से पूरे परिवार की सेहत जुड़ी होती है साथ ही रसोई को मां अन्नपूर्णा का स्थान माना गया है। रसोई को प्रतिदिन अच्छी तरह से साफ करना चाहिए। अव्यवस्थित और गंदी रसोई से मां अन्नपूर्णा नाराज होती हैं, जिसकी वजह से आपको परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं।
हर व्यक्ति को अपने से बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। जो लोग अपने से कमजोर और बड़े-बुजुर्गो का अपमान करते हैं, उन्हें कभी भी भगवान की कृपा प्राप्त नहीं होती है। बुजुर्गों के सम्मान के बिना पूजा व्यर्थ है।