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Shani Sade Sati: मकर राशि वालों को कब मिलेगी शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति

Thu, 27 May 2021 05:03 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 27 May 2021 05:03 PM IST
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shani in 2021 Shani Sade Sati on makar rashi
मकर राशि: शनि के राशि बदलने पर पांच राशियों पर शनि का प्रभाव रहता है। - फोटो : अमर उजाला

शनिदेव हर ढ़ाई साल के बाद अपनी राशि बदलते हैं। यह सभी नौ ग्रहों में सबसे मंदगति से चलने वाले ग्रह हैं। शनि 24 जनवरी 2020 से मकर राशि में गोचर हैं। मकर राशि शनिदेव की स्वयं की राशि है। शनि के मकर राशि में होने की वजह से इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। मकर राशि के अलावा धनु और कुंभ राशि पर भी शनि की साढ़ेसाती है।

shani in 2021 Shani Sade Sati on makar rashi
shani dev

किसी भी राशि पर शनि की साढ़ेसाती सात वर्षों तक रहती हैं। इन सात वर्षों के दौरान साढ़ेसाती के तीन चरण होते हैं। तीनों चरणों में राशि पर शनि का अलग-अलग प्रभाव रहता है। लेकिन यहां ध्यान देने बात यह है कि हमेशा शनि की साढ़ेसाती बुरी नहीं होती, बल्कि जिन जातकों की कुंडली में शनि शुभ स्थिति में विराजमान होते है उनको शनि के बुरे प्रभाव से नहीं गुजरना पड़ता है। आइए जानते हैं मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती कब तक रहेगी। 

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shani dev
शनि एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए करीब ढ़ाई साल का वक्त लेते हैं। शनि के राशि बदलने पर पांच राशियों पर शनि का प्रभाव रहता है। तीन राशि पर साढ़ेसाती और दो राशि पर ढैय्या। शनि देव इस समय मकर राशि में विराजमान है।  मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। 
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shani in 2021 Shani Sade Sati on makar rashi
मकर राशि में शनि - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष गणना के अनुसार मकर राशि वालों को तब शनि की साढ़ेसाती से निजात मिलेगी जब शनि मीन राशि में अपना स्थान बदलेंगे। मीन राशि में जाते ही मकर राशि से शनि की साढ़ेसाती दूर हो जाएगी। वर्ष 2025 में शनिदेव मीन राशि में आ जा जाएंगे।
 
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शास्त्रों में शनि देव
शनिदेव को विशेष तौर पर संचित पाप कर्मों का फल प्रदान करने का अधिकार दिया है। इसलिए शनिदेव दंडाधिकारी कहलाते हैं। वे मृत्यु के देवता यमराज के दूतों में अग्रज हैं, इसलिए महर्षि वेदव्यास ने नवग्रह स्तोत्र में उन्हें ‘यमाग्रज’ कहा है। नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।। ज्योतिष शास्त्र में तमोगुण की प्रधानता वाले क्रूर ग्रह शनि को दुख का कारक बताया गया है। वह देव, दानव और मनुष्य आदि को त्रास देने में समर्थ हैं शायद इसीलिए उन्हें दुर्भाग्य देने वाला ग्रह माना जाता है। किंतु वास्तव में शनिदेव देवता हैं। मनुष्य के दुख का कारण स्वयं उसके कर्म हैं, शनि तो निष्पक्ष न्यायाधीश की भांति बुरे कर्मों के आधार पर वर्तमान जन्म में दंड भोग का प्रावधान करते हैं। 

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