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Surya Grahan 2023: जल्द ही लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक काल, ग्रहण का समय और धार्मिक महत्व
Wed, 02 Aug 2023 03:42 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 02 Aug 2023 03:42 PM IST
सार
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 14 अक्टूबर 2023 को लगेगा। इससे पहले साल का पहला सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल 2023 को लगा था। साल के इस दूसरे ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
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Surya Grahan
- फोटो : अमर उजाला
Surya Grahan 2023: खगोलशास्त्र और धार्मिक नजरिए से सूर्य और चंद्र ग्रहण की घटना को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण के बारे में काफी मान्यताएं हैं। ग्रहण के दौरान कई ऐसी चीजें होती है जिसे करना वर्जित माना जाता है। ग्रहण की घटना को बहुत ही अशुभ माना जाता है। इस दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। वहीं खगोल शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण की घटना तब होती है जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है। ऐसे में चंद्रमा सूर्य को ढ़क लेता है और कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती है। इसे ही सूर्य ग्रहण कहते हैं। आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण कब लगने जा रहा है और इसका सूतककाल कितने बजे शुरू होगा।
Surya Grahan
- फोटो : iStock
साल 2023 का दूसरा सूर्य ग्रहण
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार साल 2023 का दूसरा सूर्य ग्रहण 14 अक्तूबर को लगने जा रहा है। यह ग्रहण अश्विन माह की अमावस्या तिथि को लगेगा। आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि पर ही लगता है। भारतीय समय के अनुसार साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 14 अक्तूबर की रात 08 बजकर 34 मिनट से शुरू होगा जो 2 बजकर 24 मिनट तक चलेगा।
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surya grahan
कहां-कहां दिखाई देगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
14 अक्तूबर 2023 को लगने वाला सूर्य ग्रहण को उत्तरी अमेरिका, कनाडा, आइलैंड, अर्जेटीना, क्यूबा, पेरु, उरुग्वे और ब्राजील में देखा जा सकेगा। भारत में इस सूर्य ग्रहण को नहीं देखा जा सकता है।
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surya grahan
सूर्य ग्रहण 2023 का सूतक काल
सूर्य ग्रहण की घटना के दौरान ग्रहण का सूतक काल ग्रहण के 12 घंटे पहले से शुरू हो जाता है और जब ग्रहण खत्म होता है तब सूतक काल का प्रभाव भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में 14 अक्तूबर को लगने वाला सूर्यग्रहण का सूतक काल सुबह 08 बजकर 34 मिनट से शुरू हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतककाल के दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य नहीं करना होता है। सूतक काल में न ही खाना पकाया जाता और न ही खाना खाया जाता है। सूतक काल के दौरान भगवान को स्पर्श करना और उनकी पूजा करना भी वर्जित होता है। सूर्य ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं। ग्रहण की समाप्ति के साथ ही सूतक काल खत्म होता जाता है और फिर पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव किया जाता है। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतककाल मान्य नहीं होगा।
सूर्य ग्रहण की घटना के दौरान ग्रहण का सूतक काल ग्रहण के 12 घंटे पहले से शुरू हो जाता है और जब ग्रहण खत्म होता है तब सूतक काल का प्रभाव भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में 14 अक्तूबर को लगने वाला सूर्यग्रहण का सूतक काल सुबह 08 बजकर 34 मिनट से शुरू हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतककाल के दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य नहीं करना होता है। सूतक काल में न ही खाना पकाया जाता और न ही खाना खाया जाता है। सूतक काल के दौरान भगवान को स्पर्श करना और उनकी पूजा करना भी वर्जित होता है। सूर्य ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं। ग्रहण की समाप्ति के साथ ही सूतक काल खत्म होता जाता है और फिर पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव किया जाता है। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतककाल मान्य नहीं होगा।