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चमत्कारिक रमल ज्योतिष विद्या बताती है सटीक भविष्य, भगवान शिव ने सती को खोजने के लिए किया था प्रयोग

Thu, 21 Aug 2025 04:25 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 21 Aug 2025 04:25 PM IST
सार

Ramal Astrology: रमल विद्या एक प्रकार की भविष्यवाणी प्रणाली है, जो विशेष रूप से पासों (सांकेतिक चिह्नों) के आधार पर भविष्य को जानने के लिए प्रयोग की जाती है। इसमें कुंडली की आवश्यकता नहीं होती, और यह सामान्यतः सरल और तात्कालिक तरीके से भविष्य के घटनाओं को देखने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

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Ramal Jyotish Predict Your Life Path with Ramal Jyotish and Dice
ramal jyotish - फोटो : amarujala

Ramal jyotish 2025: रमल ज्योतिष, ज्योतिष शास्त्र की एक प्रमुख शाखा है, जिसका जन्म भारत में हुआ था। यह विद्या मुख्य रूप से रेत पर अंकों और रेखाओं के माध्यम से भविष्यवाणी करने की प्रक्रिया पर आधारित है। शुरू में भारत में यह अत्यधिक प्रचलित थी, लेकिन समय के साथ इसका प्रभाव कुछ कम हो गया। मुगलों के आगमन के बाद, यह विद्या अरब देशों में पहुंची और वहां इसने अपनी पहचान बनाई, जहां इसे "इल्म-ए-रमल" के नाम से जाना गया।


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अरब देशों में रमल ज्योतिष का प्रभाव तेजी से बढ़ा और यहाँ इसे न केवल ज्ञान का एक हिस्सा माना गया, बल्कि यह समाज में भी लोकप्रिय हो गया। कई मुसलमान ज्योतिषी इसे भारत के प्राचीन बिंदु विज्ञान से जुड़ा मानते हैं, जिसे समय के साथ विस्मृत कर दिया गया था। हालांकि, भारत में यह विद्या धीरे-धीरे कम हो गई, लेकिन अरब में इसका प्रसार और विकास हुआ, जिससे यह एक नया रूप लेकर सामने आई।
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ramal jyotish - फोटो : amarujala

रमल ज्योतिष का भगवान शिव से गहरा संबंध
रमल ज्योतिष का भगवान शिव से गहरा संबंध है, और इसकी उत्पत्ति से जुड़ी कई रोचक मान्यताएँ हैं। एक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव सती के वियोग में अत्यधिक दुखी थे, तो महाभैरव ने उन्हें चार बिंदु बनाए और उन्हें अपनी प्रिय सती को खोजने के लिए इन बिंदुओं से संकेत प्राप्त करने का तरीका बताया। भगवान शिव ने विशेष विधि से इन बिंदुओं का उपयोग करके अपनी प्रिय सती को सातवें लोक में देखा। यही वह समय था जब बिंदु और रेखा शास्त्र का प्रादुर्भाव हुआ और रमल ज्योतिष की नींव रखी गई।
एक अन्य कथा के अनुसार, एक व्यक्ति अरब के रेगिस्तान में भटक रहा था और थक-हार कर बैठ गया। चारों ओर केवल बालू दिखाई दे रही थी, और वह अपनी मंजिल खो चुका था। तब साक्षात शक्ति ने उसकी सहायता की और उसके सामने चार रेखाएँ और बिंदु बनाए। इन बिंदुओं के माध्यम से उसे अपने गंतव्य तक पहुंचने का रास्ता दिखाया गया। इस घटना से रमल शास्त्र का जन्म हुआ, और तब से यह विद्या प्रचलन में आई।

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ramal jyotish - फोटो : adobe stock

भविष्यवाणी का तरीका
रमल ज्योतिष में भविष्यवाणी करने का तरीका अन्य ज्योतिष शास्त्र से अलग होता है। इस विधि में कुंडली की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि प्रश्नकर्ता के द्वारा पूछे गए सवालों के आधार पर भविष्यवाणी की जाती है। रमलाचार्य एक विशेष चार्ट पर पासे (जो अरबी में 'कुरा' कहलाते हैं) फेंकते हैं। पासे में विभिन्न शकलें (आकृतियाँ) बनती हैं, और उन शकलों के आधार पर भविष्यवाणी की जाती है।

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ramal jyotish - फोटो : amarujala

पासे का प्रयोग
रमल शास्त्र में पासे का विशेष महत्व है। पासे को प्रश्नकर्ता के हाथों से फेंका जाता है, और यह एक विशेष चार्ट पर डाला जाता है। पासे के गिरने के बाद जो आकृतियाँ बनती हैं, उन्हें देखकर भविष्यवाणी की जाती है। इन आकृतियों को "शकल" कहा जाता है। रमल शास्त्र उन लोगों के लिए एक आदर्श विकल्प है जिनके पास अपनी जन्मकुंडली नहीं है या जिन्हें अपनी जन्मतिथि का पता नहीं है।

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ramal jyotish - फोटो : amarujala

जायचा का निर्माण
रमल ज्योतिष में, पासा फेंकने के बाद एक विशेष प्रकार का "जायचा" (या प्रस्तार) तैयार किया जाता है। इस जायचा में 16 घर होते हैं, जिनमें प्रत्येक घर एक तत्व से जुड़ा होता है। 1, 5, 9 और 13वां घर अग्नि तत्व, 2, 6, 10 और 14वां घर वायु तत्व, 3, 7, 11 और 15वां घर जल तत्व, और 4, 8, 12 और 16वां घर पृथ्वी तत्व से संबंधित होते हैं। इसके आधार पर शकलों से भविष्य के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।

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