Jupiter Transit 2024: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति का जीव का कारक और शुभ ग्रह माना जाता है। ज्योतिष में गुरु का गोचर बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। शनि के बाद गुरु मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं और यह किसी एक राशि में करीब 13 महीनों तक भ्रमण करते हैं फिर दूसरी राशि में गोचर करते हैं। गुरु का गोचर सभी राशि के जातकों के लिए विशेष प्रभावी होता है। जब भी गुरु का गोचर होता है तो इसका प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर पड़ता है। आपको बता दें गुरु 22 अप्रैल 2023 को अपनी स्वराशि मीन की यात्रा को विराम देते हुए अपने मित्र मंगल की राशि में मेष में प्रवेश किया था जो अभी तक इसी राशि में भ्रमण कर रहे हैं। अब गुरु जल्द ही अपनी राशि बदलने वाले हैं।
Jupiter Transit 2024: 01 मई को गुरु करेंगे राशि परिवर्तन, इन राशियों पर मेहरबान होंगे देवगुरु बृहस्पति
वृषभ राशि
गुरु का गोचर आपकी राशि से प्रथम भाव में हो रहा है। इस राशि के जातकों के लिए गुरु आठवें और एकादश भाव के स्वामी हैं। वृषभ राशि में गोचर आपके लिए विशेष लाभकारी साबित होगा। भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा। इस भाव में देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि आपके पंचम, सप्तम और भाग्य स्थान पर होगी। देवगुरु बृहस्पति का यह गोचर वृषभ राशि के जातकों के लिए उनके मन की सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला होगा। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। आपको प्रमोशन प्राप्त होगा। सुखद समाचार प्राप्त होंगे। आप विदेश जा सकते हैं। वृषभ राशि में गोचर करने से आपके वैवाहिक जीवन में आपको अत्यधिक सुख और आनंद की प्राप्ति होगी। आपका भाग्य उत्तम रहेगा।
गुरु का गोचर मिथुन राशि के जातकों के द्वादश भाव यानी 12वें भाव में होगा। इस तरह से मिथुन राशि के लिए सप्तम और दशम भाव के स्वामी होंगे। इस भाव में विराजमान देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि आपके चतुर्थ भाव, छठे भाव और अष्टम भाव पर होगी। समाज में आपको मान-सम्मान मिलेगा और सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। लेकिन आपको खर्चे बढ़ जाएंगे। नौकरीपेशा जातकों को नई नौकरी के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे।
कर्क राशि के जातकों के लिए मई माह में गुरु का गोचर किसी वरदान से कम नहीं है। गुरु का गोचर आपके लाभ स्थान में होने जा रहा है और यह आपके छठे और नवम भाव के स्वामी हैं। यहां से देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि आपके तृतीय भाव, पंचम भाव और सप्तम भाव पर रहने वाली है। कर्क राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति का गोचर उनकी सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाला रहने वाला है। इस समय आपको अपने व्यवसाय में इच्छित लाभ की प्राप्ति होगी। बृहस्पति के इस गोचर के दौरान आपके घर में किसी नन्हे मेहमान का आगमन भी हो सकता है। देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव से आपके वैवाहिक जीवन में भी सुख और आनंद की स्थिति बनी रहेगी।
गुरु का गोचर होने से मकर राशि के जातकों के लिए पंचम स्थान पर होगा। देवगुरु बृहस्पति तृतीय और द्वादश भाव के स्वामी हैं। कुंडली के पांचवें भाव से व्यक्ति की शिक्षा, बुद्धि, प्रेम और संतान के सुख का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान बृहस्पति की दृष्टि आपके भाग्य भाव, लाभ स्थान और प्रथम स्थान पर होगी। देवगुरु बृहस्पति के इस इस गोचर से आपके घर में किसी नन्हे मेहमान का आगमन हो सकता है। इसके अलावा जिन जातकों का विवाह नहीं हो रहा है उनके विवाह का प्रस्ताव आ सकता है।