Jyotish Bhavishyavani 2025: वर्ष 2025 का यह छटवां माह है यानी की आधा साल बीत गया है आधा और बाकी है और उसके बाद यह वर्ष समाप्त हो जाएगा, लेकिन साल के पहले छह माह पूरे देश के लिए कठिनाइयों वाले रहे हैं। कुंभ में भगदड़, पहलगांव आतंकी हमला, युद्ध के हालात, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक महायुद्ध की संभावना के साथ ही कोराना वायरस का फैलना यह सारी चुनौतियों से देश इस समय में गुजरा है। खास बात यह है कि जून अभी शुरू ही हुआ है कि अहमदाबाद विमान हादसे से पूरा देश स्तब्ध है। यह सारी कठिनाइयां और परिस्थितियां ज्योतिष के अनुसार ग्रह गोचर परिवर्तन और बड़े नक्षत्रों में बदलाव के चलते हो रही हैं।
Jyotish Bhavishyavani 2025: देश के लिए मुश्किल रहे साल के छ माह, अब ज्योतिषी ने बताया होंगी ये बड़ी घटनाएं
Jyotish Bhavishyavani 2025: इस वर्ष की शुरुआत में ही देवगुरु बृहस्पति वृषभ राशि में, न्याय कारक शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में, राहु और केतु मीन और कन्या राशि में गोचर कर रहे थे।
इस वर्ष की शुरुआत में ही देवगुरु बृहस्पति वृषभ राशि में, न्याय कारक शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में, राहु और केतु मीन और कन्या राशि में गोचर कर रहे थे। इस वर्ष इन सभी प्रमुख ग्रहों का गोचर परिवर्तन भी होना था, शायद यह काफी महत्वपूर्ण भी था क्योंकि एक साथ कुछ दिनों के अंतराल में इतने ग्रहों का गोचर बदलना सामान्य घटना नहीं थी। 29 मार्च को मीन राशि में षटग्रही योग बना और इसके बाद 22 अप्रैल को देश में सबसे ज्यादा दुखद घटना हुई जिसमें पहलगाम में पूरे देश से गए हुए निर्दोष पर्यटकों पर आतंकवादी हमला हुआ,यह हमला अब तक की आतंकवादियों घटनाओं में सबसे क्रूर और बर्बरता पूर्वक किया गया नरसंहार था। इस नरसंहार में धर्म पूंछ कर निर्दोष भारतीयों की हत्या कर दी गई।
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12 जून को देवगुरु बृहस्पति अस्त हो चुके हैं, इसका अर्थ है बृहस्पति तेजहीन हो गए और 7 जून को मंगल अपनी राशि बदलकर सिंह राशि में केतु के साथ आ गए और राहु कुंभ राशि में दोनों ग्रहों के सामने, यह एक विध्वंसकारी योग बना , इसमें राशि के तत्व को जानना जरूरी है , राहु वायु तत्व राशि कुंभ में, मंगल और केतु अग्नि तत्व राशि सिंह में, और जीव कारक ग्रह गुरु अस्त होने से तेजहीन हो गए और वायु और अग्नि तत्व ने मिलकर ग्रहों का ऐसा संयोग बनाया कि अहमदाबाद से लंदन जा रहे विमान को क्षणभर में आग के हवाले कर दिया, राहु जैसे ग्रह जो रहस्यमय घटनाएं देते हैं,शायद समझने का मौका नहीं दिया और 241 लोग काल के मुंह में समा गए। ऐसी आशंका थी और वही हो गया। मंगल का केतु के साथ गोचर में जाना और गुरु का अस्त होना इस हृदय विदारक घटना का मूल कारण बना।
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संभवतः जीव कारक ग्रह बृहस्पति यदि अस्त न होते तो यह घटनाक्रम न होता। इस वर्ष मेरा शुरू से कहना रहा कि बृहस्पति की अतिचारी गति बहुत नुकसानदायक साबित होगी। यह सामान्य बात नहीं है कि बृहस्पति जैसा नैसर्गिक शुभ ग्रह की गति अस्थिर हो जाये और निर्दोष आम जनमानस सुरक्षित रह सके। आगे आने वाले समय में अभी शनि वक्री होंगे,और यह समय होगा 13 जुलाई से 28 नवंबर तक का , यद्यपि देवगुरु बृहस्पति 9 को जुलाई में उदित अवस्था में आ जायेंगे किन्तु उनकी गति अतिचारी ही रहेगी, वक्री शनि पुनः कुंभ राशि को प्रभावित करेंगे, जहां पहले से राहु स्थित हैं और ठीक सामने मंगल और केतु की युति, मंगल 28 जुलाई तक सिंह राशि में गोचर करेंगे इसलिए 12 जुलाई से 28 जुलाई के मध्य कोई प्राकृतिक आपदा, देशों के बीच युद्ध,वायुयान दुर्घटना, किसी राजनेता के जीवन को खतरा, भूकंप, बाढ़ और जल प्रलय की घटनाएं हो सकती हैं।
किंतु अभी 28 नवंबर तक देश दुनियां में कुछ असामान्य घटनाएं जिनका जिक्र ऊपर किया गया है घटती रहेंगी। अतिचारी बृहस्पति और वक्री शनि धर्म के नाम पर आडम्बर कर रहे लोगों को सबक अवश्य सिखायेंगे। यह निश्चित है। भारत को पड़ोसी देशों से सावधान रहना होगा क्योंकि वो कभी भी साजिश कर सकते हैं और पहलगाम हमले की पुनरावृत्ति करने की कोशिश भी हो सकती है। किंतु भारत की कुंडली की मजबूत स्थिति उनको मुंह तोड जवाब भी देगी।
अंत में एक और विषय जिस पर आम जनमानस बहुत प्रश्न करता है कि क्या आज की विमान दुघर्टना या पहलगाम आतंकवादी हमले में ऐसी स्थिति थी कि मृत्यु को प्राप्त हुए सभी लोगों की कुंडली में मार्केश था,तो इसका उत्तर यह है कि नहीं ऐसा नहीं था कि सभी पत्रिकाओं में मार्केश था किंतु जिस समय,क्षण यह घटनाएं हुई उस समय उस स्थान की ग्रह स्थिति ऐसी थी, जिसमें जो आया उस ग्रहों के चक्र में उसको जाना पड़ा, उसमें भी ईश्वर कृपा सर्वश्रेष्ठ है जैसे आज की विमान दुघर्टना में रमेश कुमार विश्वास के साथ हुआ जो किसी आश्चर्य से कम नहीं था, किंतु इसके मूल में सिर्फ ईश्वर कृपा ही थी।
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