जीवन में किसी न किसी मोड़ पर समस्याएं हमें घेरती हैं और ज्योतिष के नजरिए से ऐसा जन्मकुंडली में स्थित ग्रहों की खराब स्थती, उनकी दशा-अंतर्दशा, साढ़ेसाती आदि के कारण होता है। यदि कुंडली के ग्रह पीड़ित व दोष युक्त हों तो इसका हमारे जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण हमें केवल और केवल नुकसान ही होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ऐसे विभिन्न प्रकार के उपाय हैं जिनकी मदद से मनुष्य अपने दुःखों पर काफी हद तक नियंत्रण पा सकता है। ज्योतिष ज्ञान हमें विभिन्न उपायों की जानकारी से अवगत कराता है। ये उपाय ग्रहों को अनुकूल करते हुए सफल जीवन व्यतीत करने में हमारी सहायता करते हैं। आइये जानते हैं वैदिक ज्योतिष के मुख्य उपाय के बारे में...
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हवन कुंड (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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पूजा अनुष्ठान- ज्योतिष में अनिष्ट ग्रहों की शांति का बहुत महत्व होता है। कुंडली परीक्षण के उपरांत अनिष्ट ग्रहों की विधिवत् व शास्त्रानुसार शांति के लिए कई प्रक्रियाएं हैं, जैसे अनिष्ट ग्रह के जाप-अनुष्ठान, हवन आदि इनमें नवग्रह शांति, रुद्राभिषेक, शत चंडी महायज्ञ आदि।
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मंत्र
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मंत्र- ज्योतिष में कुल नौ ग्रह हैं सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु जो व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। कुंडली मे अगर कोई ग्रह अशुभ फल देते हैं तो उनसे बचने के लिए ग्रहों से संबंधित मंत्रों का जप करना चाहिए। वैदिक ज्योतिष में कुछ ऐसे मंत्र हैं जो कि अत्यंत प्रभावशाली माने गए हैं। जिनमें 9 ग्रहों के 9 बीज मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र:, बगलामुखी मंत्र आदि।
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हनुमान यंत्र (प्रतीकात्मक)
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यंत्र- यंत्र एक प्रकार से सुरक्षा कवच हैं और यह कागज पर, भोजपत्र पर या तांबे पर बनाया जाता है। यंत्र-रचना मात्र रेखांकन नहीं है, बल्कि उसमें वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। यंत्र देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। जो ग्रह मारक या बाधक हो उस ग्रह की पूजा यंत्र द्वारा करें। यंत्र को मंत्र का रूप माना जाता है। नवग्रह यंत्र, श्री यंत्र, श्री महालक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र आदि।
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व्रत की थाली
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उपवास- किसी विशेष उद्देश्य या कामना की पूर्ति के लिए या निष्काम भाव से उपवास करना भगवान की कृपा प्राप्ति का एक सरल साधन है। विधिपूर्वक किए गए व्रत का फल अवश्य मिलता है। ग्रह दोष निवारण के लिए संबन्धित ग्रह का व्रत करना चाहिए।