सामुद्रिक शास्त्र में व्यक्ति के अंगों के आकार, रंग, निशान और उसके लक्षणों का अध्ययन करके व्यक्ति के बारे में जानकारी दी जाती है। यह अत्यंत ही प्राचीन विधा है, जिसपर लोग काफी सालों से विश्वास करते आ रहे हैं। इसी तरह से हम सब के बोलने, बात करने का तरीका अलग-अलग होता है। आप भले ही इसपर कोई विशेष ध्यान न देते हो लेकिन सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति के बोलचाल का तरीका उसके बारे में बहुत कुछ कहता है। किसी भी व्यक्ति के बाते करने के तरीके से आप जान सकते हैं कि उसका असली स्वभाव कैसा है वह अंदर से किस स्वभाव का है। तो चलिए जानते हैं कि किस तरह बात करने वाले लोग किस स्वभाव के होते हैं।
बहुत जल्दी-जल्दी स्पष्ट न बोलने वाले
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार जो लोग बहुत तेजी से जल्दी-जल्दी बोलते हैं और अपनी कोई भी बात स्पष्ट लहजे में बात नहीं करते है, ऐसे लोग अपने मन में न ही कुछ छिपाकर रख पाते हैं और न ही कोई बात स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं। ऐसे में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे लोग विश्वास के पात्र नहीं माने जाते हैं। इनपर पूरी तरह आंख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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अपेक्षाकृत ऊंचे स्वर में बोलने वाले
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार जो लोग दूसरों की अपेक्षा ऊंचे स्वर में बात करते हैं, और उनकी आवाज अपेक्षाकृत तेज होती है। ऐसे लोगों का स्वभाव हठी होता है। ये लोग जिद्दी किस्म के होने के साथ अपनी राय दूसरों पर थोपना पसंद करते हैं। ये लोग दूसरों का ध्यान अपनी और आकर्षित करना चाहते हैं।
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कर्कशतापूर्ण बोलने वाले बोलते वाले
जो लोग हमेशा कर्कशतापूर्ण बोलते हैं और बोलते समय उनके शब्द टूटे हुए से लगते हैं, तो ऐसे लोग झगड़ालू प्रवृति के होते हैं। कर्कश वाणी बोलने का कारण व्यक्ति के अंदर छिपी पीड़ा भी होती है।
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दहाड़ कर बोलने वाले
जिन लोगों की आवाज आराम से बात करते हुए भी दहाड़ती और घुर्राने जैसी प्रतीत होती है, ऐसे लोगों के बारे में सामुद्रिक शास्त्र कहता है कि ये लोग गंभीर और संयमी स्वभाव के होते हैं। ऐसे लोग गहन अध्ययन करना पसंद करते हैं। इसी कारण ये लोग विद्वान होते हैं।