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काशी मंथनः पाक-चीन के बढ़ते रिश्ते भारत के लिए चिंताजनक, देश को सतर्क रहने की जरूरत

Sun, 18 Mar 2018 12:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 18 Mar 2018 12:51 PM IST
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Pakistan and china relationship is danger for india
काशी मंथन का उद्घाटन - फोटो : अमर उजाला
देश के पूर्व सैन्य अफसरों ने शनिवार को काशी में राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंथन किया। बीएचयू के शताब्दी कृषि सभागार में हुए ‘काशी मंथन’ में देश के मौजूदा हालात और वैश्विक परिदृश्य को सामने रखते हुए उन बिंदुओं पर खास तौर से चर्चा हुई, जिन पर देश को सतर्क रहने की जरूरत है।
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पूर्व सैन्य अफसरों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आपसी एकजुटता को सबसे अहम तत्व बताया। चीन की महत्वाकांक्षी नीतियां और पाकिस्तान से उसके गहराते रिश्ते को भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता और चुनौती के रूप में पेश किया।
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लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने जम्मू-कश्मीर के परिप्रेक्ष्य में भारत-पाकिस्तान की सैन्य रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि सबसे बड़ा खतरा रडार से नीचे की रणनीति से है। उन्होंने पाकिस्तान और चीन के गहरे होते रिश्ते का जिक्र करते हुए उनके मनोवैज्ञानिक युद्ध की स्ट्रेटजी को भी रेखांकित किया। 
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अफगानिस्तान और म्यांमार में भारत के राजदूत रह चुके विवेक काटजू ने कहा कि पाकिस्तान एक असंतुष्ट राष्ट्र है। उसकी वास्तविक प्रकृति को समझते हुए भारत को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रति अपनी नीतियां तय करनी होंगी।

चीन-भारत संबंध पर चर्चा

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सैयद अता हसनैन - फोटो : अमर उजाला
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने भारतीय सुरक्षा व्यवस्था में नौ सेना की भागीदारी बढ़ाए जाने पर बल दिया। नौसेना को समुचित महत्व के साथ लगातार अत्याधुनिक और उन्नत बनाने पर ध्यान देना जरूरी है।

लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. राकेश शर्मा ने चीन-भारत संबंध पर चर्चा की। कहा कि चीन की महत्वाकांक्षी दीर्घकालिक योजनाओं को ध्यान में रखते हुए हमें अपनी तैयारी करनी चाहिए।

पूर्व विदेश सचिव कवल सिब्बल ने देश के कूटनीतिक संबंधों पर चर्चा की। आयोजन सचिव और विश्वविद्यालय के संयुक्त कुलसचिव मयंक नारायण सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यवाहक कुलपति डॉ. नीरज त्रिपाठी, छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह, प्रो. केके सिंह, प्रो. प्रियंकर उपाध्याय आदि मौजूद रहे। 
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