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मांझी के बिगड़े बोल: कहा- पंडित... आते हैं, कहते हैं खाएंगे नहीं आपके यहां, बस नकद दे दीजिए
Sun, 19 Dec 2021 01:18 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 19 Dec 2021 01:18 PM IST
सार
Jitan Ram Manjhi News: भुइयां मुसहर सम्मेलन के दौरान बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने पंडितों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर दिया।
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जीतन राम मांझी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने पंडित जाति के लिए अपशब्द का इस्तेमाल कर विवाद खड़ा कर दिया है। दरअसल शनिवार को पटना में भुइयां मुसहर सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जीतन राम मांझी मुख्य अतिथि थे। इसी दौरान उन्होंने पंडितों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग कर दिया।
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जानें क्या कहा मांझी ने
कार्यक्रम में मांझी ने कहा कि आजकल गरीब तबके के लोगों में धर्म की परायणता ज्यादा आ रही है। सत्यनारायण भगवान की पूजा का नाम हम लोग नहीं जानते थे। *** अब हर टोला में हम लोगों के यहां सत्यनारायण भगवान पूजा होती है। इतना भी शर्म लाज नहीं लगता है कि पंडित *** आते हैं और कहते हैं कि कुछ नहीं खाएंगे आपके यहां...बस कुछ नकद दे दीजिए।
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मांझी के बयान के बाद गरम हुई सियासत
मांझी के बयान के बाद सियासत गरम हो गई है। विपक्षी दल के कई नेता उन्हें घेरने में लग गए हैं। वहीं बचाव करने के लिए आए उनकी पार्टी के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि मांझी के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मांझी की सभी संप्रदाय और तमाम जातियों के प्रति उनकी आस्था है। उन्होंने स्पष्ट तरीके से कहा है कि कुछ लोग ब्राह्मण भाइयों को अपने घर में बुलाते हैं लेकिन वह ब्राह्मण उन गरीबों के घर में खाना भी नहीं खाते हैं, मगर फिर भी उन्हें पैसा दे दिया जाता है। मांझी ने ऐसे लोगों का विरोध किया है।
मांझी ने दी सफाई
जीतन राम मांझी ने सफाई देते हुए कहा कि मैंने अपने समुदाय के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया था ना कि पंडितों के लिए। अगर कोई गलतफहमी हुई है तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूं। मैंने अपने समुदाय के लोगों से कहा है कि आज आस्था के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन गरीबों का कल्याण नहीं हो रहा है। पहले एससी लोग पूजा में विश्वास नहीं करते थे लेकिन अब पंडित उनके घर आते हैं, खाने से मना करते हैं लेकिन पैसे लेते हैं।