मध्यप्रदेश उपचुनाव: चुनाव आयोग ने कमलनाथ से छीना स्टार प्रचारक का दर्जा, अदालत जाएगी कांग्रेस
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भारतीय चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ से स्टार प्रचारक का दर्जा छीन लिया है। आयोग ने गुरुवार को यह फैसला कमलनाथ द्वारा आदर्श आचार संहिता का बार-बार उल्लंघन करने के चलते लिया। वहीं, कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ अदालत का रुख करने का फैसला किया है। कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के नरेंद्र सलूजा ने कहा है कि पार्टी चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ अदालत जाएगी।
आयोग ने कहा है कि अब से कमलनाथ ने अगर एक भी प्रचार कार्यक्रम में हिस्सा लिया तो पूरा खर्च वह उम्मीदवार वहन करेगा जिसके विधानसभा क्षेत्र में प्रचार कार्यक्रम आयोजित होरहा होगा। कमलनाथ के लिए यह संकट तब शुरू हुआ था जब उन्होंने भाजपा नेता इमरती देवी को आइटम कह कर संबोधित किया था। इसे लेकर आयोग ने उन्हें नोटिस भी जारी किया था। बता दें कि इस समय राज्य की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए प्रचार का दौर चल रहा है।
If any campaign is done by Kamal Nath from now onwards, the entire expenditure will be borne by the candidate in whose constituency campaign is being undertaken, says Election Commission. https://t.co/M0N1tcfoV7
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) October 30, 2020
चुनाव आयोग ने कमलनाथ को आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान सार्वजनिक तौर पर इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी थी। बता दें कि मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार 28 विधानसभा सीटों पर एक साथ उपचुनाव होने जा रहे हैं। तीन नवंबर को होने वाले इस उपचुनाव से यह तय होगा कि प्रदेश की सत्ता में सत्तारूढ़ भाजपा कायम रहेगी या विपक्षी कांग्रेस सत्ता में आएगी। इस चुनाव की मतगणना 10 नवंबर को होगी।
कांग्रेस ने इन 30 नेताओं को बनाया था स्टार प्रचारक
राज्य में उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कमलनाथ समेत 30 नेताओं को स्टार प्रचारक बनाया था। इस सूची में इनके अलावा मुकुल वासनिक, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, दिग्विजय सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू, सचिन पायलट, अशोक चव्हाण, रणदीप सुरजेवाला, कांतिलाल भूरिया, सुरेश पचौरी, अरुण यादव, विवेक तंखा, राजमणि पटेल, अजय सिंह, आरिफ अकील, सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह, प्रदीप जैन, लाखन सिंह यादव, गोविंद सिंह, नामदेव दास त्यागी, आचार्य प्रमोद कृष्णा, साधना भारती, आरिफ मसूद, सिद्धार्थ कुशवाहा और कमलेश्वर पटेल को शामिल किया गया था।
उल्लेखनीय है कि इस साल मार्च में कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक कांग्रेस के 22 विधायक त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसकी वजह से प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ ने 20 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद कांग्रेस के तीन अन्य विधायक भी भाजपा में शामिल हो गए थे। 25 सीटें कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने से खाली हुई हैं, जबकि दो सीटें कांग्रेस विधायकों के निधन से और एक सीट भाजपा विधायक के निधन से रिक्त हुई है।
