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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Where the Namibian cheetahs are being settled, the descendants of the princely state asking for the land back

Kuno National Park: जहां बसाए जा रहे नामीबियाई चीते, वो जमीन वापस मांग रहे रियासत के वंशज, जानें क्या है मामला

Sat, 17 Sep 2022 09:05 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sat, 17 Sep 2022 09:05 AM IST
सार

जिस जमीन पर चीतों को बसाया जा रहा है, उस जमीन पर हक रखने वाले राजघराने ने जमीन वापस लेने के लिए कोर्ट में अपील कर दी है। जिसकी सुनवाई एडीजे कोर्ट में 19 सितंबर को होना है। 

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Where the Namibian cheetahs are being settled, the descendants of the princely state asking for the land back
राजघराने ने जमीन वापस लेने के लिए कोर्ट में अपील कर दी है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्य प्रदेश के कूनो में कल नामीबिया से चीतों को लाया जा रहा है। सारी तैयारी हो चुकी है। पीएम नरेंद्र मोदी भी यहां पहुंच रहे हैं। वे चीता प्रोजेक्ट योजना का शुभारंभ करेंगे। इधर जिस जमीन पर चीतों को बसाया जा रहा है, उस जमीन पर हक रखने वाले राजघराने ने जमीन वापस लेने के लिए कोर्ट में अपील कर दी है। जिसकी सुनवाई एडीजे कोर्ट में 19 सितंबर को होना है। 
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राजघराने के  वंशजों का दावा है कि जमीन जब ली गई थी तब कहा गया था कि यहां गुजरात के शेरों को बसाया जाएगा, पर अब विदेशों से चीतों को लाकर यहां रखा जा रहा है। हमें हमारी जमीन वापस चाहिए। श्योपुर में पालपुर राजघराने की ओर से श्योपुर जिले के विजयपुर अतिरिक्त सत्र न्यायालय में ग्वालियर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना संबंधी याचिका दायर की गई है।
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जानकारी के अनुसार पालपुर रियासत के वंशज शिवराज कुंवर, पुष्पराज सिंह, कृष्णराज सिंह, विक्रमराज सिंह, चंद्रप्रभा सिंह, विजयाकुमारी आदि 2010 में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ग्वालियर हाईकोर्ट पहुंचे थे। याचिका (क्रमांक 4906/10) के तर्क सुनकर कहा था मामले को पहले सेशन में कोर्ट में सुना जाना चाहिए। 2013 में श्योपुर कलेक्टर के मार्फत इस मामले को विजयपुर सेशन कोर्ट में ले जाने के निर्देश दिए थे, लेकिन 2013 से श्योपुर में पदस्थ कलेक्टर इस मामले को टालते रहे। आवेदकों ने 2019 में श्योपुर कलेक्टर के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू की, तब तत्कालीन श्योपुर कलेक्टर ने मामले को विजयपुर सत्र न्यायालय में भेजा। याचिकाकर्ताओं का ये भी आरोप है कि कलेक्टर ने गलत जानकारी के साथ मामला पेश किया। 

Where the Namibian cheetahs are being settled, the descendants of the princely state asking for the land back
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : Social Media
पालपुर रियासत के वंशज गोपाल देव सिंह ने बताया कि जमीन देने का असल उद्देश्य जंगल बचाना था। शेर आते तो जंगल बचता। कूनो को गुजरात के गिर शेरों को लाने के लिए अभयारण्य घोषित किया गया तो उन्हें अपना किला और 260 बीघा भूमि खाली करनी पड़ी। अब चीते आ रहे हैं, जिनके लिए बड़े-बड़े मैदान बनाने के लिए कई पेड़ काटे जा रहे हैं। अधिग्रहण की कार्रवाई भी सही नहीं हुई। हमारी दलीलों को हाईकोर्ट ने सही माना और हमें निचली अदालत में जाने को कहा, पर श्योपुर कलेक्टर ने सालों तक मामला अटकाए रखा। अदालत में पालपुर परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता मुरली मनोहर पाराशर का कहना है कि इस मामले की पहली सुनवाई 8 सितंबर को हो चुकी है, अगली तारीख 19 सितंबर की लगी है। हम चाहते हैं कि हमें हमारी पुश्तैनी संपत्ति वापस मिल जाए। 

इन आपत्तियों के सहारे लगाई याचिका
  • याचिका में बताया गया है कि जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई ही नियमानुसार नहीं हुई है। 1981 में अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी। सिंह परियोजना के लिए जमीन ली गई थी। नियमानुसार अधिसूचना के दो साल में अधिग्रहित की गई संपत्ति का अवॉर्ड जारी करना होता है, लेकिन जिला प्रशासन ने लगभग 30 साल बाद यह अवॉर्ड जारी किया। 
  • 220 बीघा जमीन के बीच पालपुर रियासत का ऐतिहासिक किला, बावड़ी, मंदिर आदि संपत्ति है, जिसके बारे में अधिग्रहण में कोई जिक्र नहीं किया गया। इन चीजों का मुआवजा भी नहीं दिया गया। सरकार इन संपत्तियों का उपयोग कर रही है। 
  • कूनो-पालपुर सेंक्चुरी में सिंचित जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसके बदले में 27 बीघा असिंचित, पथरीली जमीन दी गई है। वहीं पुश्तैनी किले, मंदिर की पूजा के लिए जाने पर सेंक्चुरी प्रशासन 2000 रुपये शुल्क लेता है, तब जाने दिया जाता है।

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