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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   101-Year-Old Woman Pilgrimage Family Carries Grandmother on Head to Devpur Dham Walks 40 km On Foot

चार पीढ़ियों का प्यार: 101 साल की दादी की इच्छा पूरी करने सिर पर उठाया, 40 किमी पैदल चलकर पहुंचाया देवपुर धाम

Tue, 25 Aug 2026 10:01 AM IST
विदिशा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विदिशा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विदिशा Published by: विदिशा ब्यूरो Updated Tue, 25 Aug 2026 10:01 AM IST
सार

विदिशा जिले के शाहपुर कॉलोनी गांव की 101 वर्षीय बनिया बाई की देवपुर धाम जाने की इच्छा को उनके परिवार ने अनोखे तरीके से पूरा किया। चार पीढ़ियों के परिवार ने करीब 40 किलोमीटर की पदयात्रा में बनिया बाई को प्लास्टिक के टब को पालकी बनाकर बारी-बारी से सिर पर उठाया।

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101-Year-Old Woman Pilgrimage Family Carries Grandmother on Head to Devpur Dham Walks 40 km On Foot
दादी को सिर पर बैठाकर देवपुर धाम ले जाता हुआ परिवार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

आज के समय में जब अखबारों में बुजुर्गों की उपेक्षा, वृद्धाश्रम और टूटते परिवारों की खबरें सुर्खियां बनती हैं, उसी दौर में विदिशा जिले की शमशाबाद तहसील के छोटे से गांव शाहपुर कॉलोनी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर देखने वाले की आंखें नम कर दीं और मन को सुकून से भर दिया। यह कहानी है 101 साल की बनिया बाई और उनके परिवार की चार पीढ़ियों की एकजुटता की।
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अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए पैदल निकले परिजन
शाहपुर कॉलोनी में रहने वाली 101 वर्षीय बनिया बाई ने अपने पूरे जीवन में कभी देवपुर धाम के दर्शन नहीं किए थे। देवपुर में स्थित बाबा विश्वनाथ धाम इस पूरे क्षेत्र में आस्था का बड़ा केंद्र है। उम्र के आखिरी पड़ाव पर बनिया बाई के मन में एक ही इच्छा थी कि एक बार पैदल चलकर बाबा के धाम जाया जाए। उन्होंने अपने परिजनों से अपनी यह अंतिम इच्छा जाहिर की कि उन्हें पैदल देवपुर ले चला जाए।
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परिवार के सामने बड़ी दुविधा थी। 101 साल की उम्र में 40 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना नामुमकिन था, लेकिन दादी की आंखों में जो आस्था और उम्मीद थी, उसे परिवार तोड़ना नहीं चाहता था। फिर परिवार ने जो किया, वह मिसाल बन गया।
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प्लास्टिक के टब को बनाया पालकी
सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में जब पूरा गांव सो रहा था, तब बनिया बाई के परिवार ने अपनी अनोखी पदयात्रा शुरू की। परिवार ने एक मजबूत प्लास्टिक के टब को ही पालकी बना लिया। उस टब में दादी बनिया बाई को बड़े सम्मान से कपड़े बिछाकर बैठाया गया। फिर शुरू हुआ सेवा का सफर। उनकी बहू सम्पा बाई, पोते विक्रम बंजारा, निहाल बंजारा और पोता-बहू कैलाशी बंजारा ने बारी-बारी से टब को अपने सिर पर उठा लिया। करीब 40 किलोमीटर तक यह परिवार दादी को सिर पर बैठाकर पैदल चलता रहा। इस भावुक पदयात्रा में परिवार के सबसे छोटे सदस्य यानी बनिया बाई के परपोते और परपोतियां भी नंगे पैर साथ चलती रहीं। रास्ते में जो भी इस दृश्य को देखता, वह ठहर जाता और परिवार को आशीर्वाद देता।

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देवपुर धाम पहुंचते ही छलके खुशी के आंसू
जब यह काफिला देवपुर धाम पहुंचा तो वहां का नजारा बेहद भावुक था। 101 साल की बनिया बाई की आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे। उन्होंने हाथ जोड़कर बाबा विश्वनाथ को धन्यवाद कहा। भावुक होते हुए बहू सम्पा बाई ने कहा, 'अम्मा का बहुत बड़ा मन था देवपुर आने का। आज उनकी इच्छा पूरी हो गई। यहां आकर ऐसा लग रहा है, जैसे हमारे परिवार की चार पीढ़ियों के चारों धाम एक साथ पूरे हो गए हों। सास हमारी धरोहर हैं।'

पहले भी सामने आई थी ऐसी मिसाल
यह पहला मौका नहीं है, जब ऐसी मिसाल सामने आई हो। इससे पहले हरियाणा की प्रसिद्ध लोक और रागिनी गायिका काजल चौधरी ने भी अपनी लगभग 90 वर्षीय सास चन्द्री देवी को इसी तरह प्लास्टिक के टब में बैठाकर और सिर पर उठाकर ब्रज की प्रसिद्ध 84 कोस परिक्रमा पूरी की थी। 252 किलोमीटर की यह कठिन यात्रा उन्होंने मई 2026 में पुरुषोत्तम मास के दौरान शुरू की थी, जो जून 2026 तक पूरे देश में चर्चा का विषय बनी रही।
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