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Bandhavgarh Tiger Reserve: बाघ शिकार के पांच दिन में सात आरोपी गिरफ्तार, नाखून और दांत बरामद
Fri, 01 Aug 2025 06:49 PM IST
उमरिया ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Fri, 01 Aug 2025 06:49 PM IST
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गिरफ्तार आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकार का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद वन विभाग की लगातार कार्रवाई जारी है। गुरुवार रात धमोखर परिक्षेत्र की टीम ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसके साथ ही पांच दिनों में अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मामले की शुरुआत 26 जुलाई को उस वक्त हुई जब टाइगर रिजर्व की टीम को एक बाघ के नाखून और दांत के अवैध कब्जे की सूचना मिली। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम ने रोहनिया गांव में हरदुल बैगा के घर पर छापेमारी की। छापे के दौरान 13 बाघ के नाखून, दो निचले जबड़े के केनाइन दांत और छह सामान्य दांत बरामद किए गए।
पूछताछ में हरदुल बैगा ने बाघ के शिकार की बात स्वीकार की और खुलासा किया कि घटना में अन्य लोग भी शामिल थे। उसकी निशानदेही पर ओमप्रकाश सिंह और रामकृपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि शिकार के बाद आरोपियों ने बाघ के शव के टुकड़े कर उसे कोर एरिया के एक बोर में डाल दिया था। इसके बाद टाइगर रिजर्व की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघ के अवशेष बरामद किए। फॉरेंसिक जांच के लिए इन अवशेषों के सैंपल लैब भेजे गए हैं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए मगधी परिक्षेत्र की टीम भी जांच में शामिल हुई और जांच के दौरान दो और आरोपी–दशरथ वैदिक और राम भवन सिंह को गिरफ्तार किया गया। गुरुवार को धमोखर परिक्षेत्र के अधिकारी सचिन सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए चेतराम अगरिया (27) और प्रभु बैगा (34) दोनों निवासी रोहनिया को हिरासत में लिया गया।
सचिन सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है और अभी भी कुछ अन्य लोगों की तलाश की जा रही है, जो इस शिकार की साजिश में शामिल हो सकते हैं। टाइगर रिजर्व की दोनों परिक्षेत्रों मगधी और धमोखर की टीमें लगातार संयुक्त रूप से जांच में जुटी हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह एक गंभीर अपराध माना जाता है और दोषियों को सख्त सजा का प्रावधान है। बाघों के अवैध शिकार की यह घटना न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए चुनौती है, बल्कि यह वन विभाग की सतर्कता की भी एक कसौटी बन गई है।
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मामले की शुरुआत 26 जुलाई को उस वक्त हुई जब टाइगर रिजर्व की टीम को एक बाघ के नाखून और दांत के अवैध कब्जे की सूचना मिली। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम ने रोहनिया गांव में हरदुल बैगा के घर पर छापेमारी की। छापे के दौरान 13 बाघ के नाखून, दो निचले जबड़े के केनाइन दांत और छह सामान्य दांत बरामद किए गए।
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पूछताछ में हरदुल बैगा ने बाघ के शिकार की बात स्वीकार की और खुलासा किया कि घटना में अन्य लोग भी शामिल थे। उसकी निशानदेही पर ओमप्रकाश सिंह और रामकृपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि शिकार के बाद आरोपियों ने बाघ के शव के टुकड़े कर उसे कोर एरिया के एक बोर में डाल दिया था। इसके बाद टाइगर रिजर्व की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघ के अवशेष बरामद किए। फॉरेंसिक जांच के लिए इन अवशेषों के सैंपल लैब भेजे गए हैं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए मगधी परिक्षेत्र की टीम भी जांच में शामिल हुई और जांच के दौरान दो और आरोपी–दशरथ वैदिक और राम भवन सिंह को गिरफ्तार किया गया। गुरुवार को धमोखर परिक्षेत्र के अधिकारी सचिन सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए चेतराम अगरिया (27) और प्रभु बैगा (34) दोनों निवासी रोहनिया को हिरासत में लिया गया।
सचिन सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है और अभी भी कुछ अन्य लोगों की तलाश की जा रही है, जो इस शिकार की साजिश में शामिल हो सकते हैं। टाइगर रिजर्व की दोनों परिक्षेत्रों मगधी और धमोखर की टीमें लगातार संयुक्त रूप से जांच में जुटी हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह एक गंभीर अपराध माना जाता है और दोषियों को सख्त सजा का प्रावधान है। बाघों के अवैध शिकार की यह घटना न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए चुनौती है, बल्कि यह वन विभाग की सतर्कता की भी एक कसौटी बन गई है।
