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एमपी: बच्चों की थाली भरने वाली रसोइयों के घर में चूल्हा जलाना मुश्किल, 3 महीने से नहीं मिला मानदेय; जानें
Thu, 10 Sep 2026 04:58 PM IST
उमरिया ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 04:58 PM IST
सार
उमरिया जिले में मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ी करीब 4 हजार रसोइयों को तीन माह से मानदेय नहीं मिला है। 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह मिलने वाली राशि अटकने से परिवारों का बजट बिगड़ गया है। पढे़ं पूरी खबर
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मानदेय पर टिकी गृहस्थी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरकारी स्कूलों में बच्चों की थाली में भोजन पहुंचाने वाली रसोइयों के सामने अब अपने ही घर की रसोई चलाने का संकट खड़ा हो गया है। मध्याह्न भोजन योजना के तहत स्कूलों में भोजन तैयार करने वाली जिले की करीब 4 हजार रसोइयों को बीते तीन माह से मानदेय नहीं मिलने की बात सामने आई है। पहले से ही सीमित आमदनी और उस पर तीन महीने से भुगतान लंबित होने के कारण रसोइयों के परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
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बताया जाता है कि मध्याह्न भोजन तैयार करने वाली प्रत्येक रसोइया को करीब 4 हजार से 5 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। राशि भले ही कम हो, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह रकम घरेलू खर्च में बड़ी भूमिका निभाती है। ऐसे में तीन महीने तक मानदेय नहीं मिलने का मतलब है कि परिवारों को लगातार आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है।
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बच्चों की थाली के लिए रोज जलता है चूल्हा
रसोइयां रोज स्कूल पहुंचकर बच्चों के लिए भोजन तैयार करने में जुट जाती हैं। सुबह से ही भोजन बनाने, व्यवस्था संभालने और बच्चों को खाना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने वाली इन महिलाओं को अपने मानदेय का इंतजार है। रसोइयों का कहना है कि काम की जिम्मेदारी लगातार बनी हुई है, लेकिन भुगतान समय पर नहीं होने से घर का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।
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पाली क्षेत्र की रसोइया मालती यादव ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि लगभग तीन महीने से हम लोगों को वेतन नहीं मिला है। इसके कारण हमारे घर का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। मालती के अनुसार, पहले ही मिलने वाली राशि सीमित है और जब वही राशि कई महीनों तक हाथ में न आए तो परिवार की जरूरतें पूरी करना काफी मुश्किल हो जाता है।
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करीब 4 हजार परिवारों पर आर्थिक असर
जिले में करीब 4 हजार रसोइयां मध्याह्न भोजन व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं। प्रत्येक को 4 से 5 हजार रुपये के आसपास मानदेय मिलने की बात बताई जा रही है। तीन महीने का भुगतान लंबित होने से बड़ी संख्या में परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। रसोइयों के सामने राशन, बच्चों की जरूरतों और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने की चुनौती है। ऐसे में वे अब लंबित मानदेय के जल्द भुगतान की उम्मीद लगाए बैठी हैं।
बीआरसी बोले, पूरे प्रदेश में ऐसी स्थिति
मानदेय भुगतान में देरी को लेकर पाली बीआरसी संतोष शिवहरे ने बताया कि होटल में काम चल रहा है, इसी वजह से रसोइयों का भुगतान अभी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पूरे मध्य प्रदेश में यही स्थिति बनी हुई है। अब सवाल यह है कि जिन रसोइयों की मेहनत से स्कूलों में बच्चों की थाली समय पर भरती है, उनके घर की रसोई का बजट कब पटरी पर आएगा। करीब 4 हजार रसोइयों को अपने लंबित मानदेय के भुगतान का इंतजार है।
